नवरात्रि के दौरान यहां लाखों की संख्या में तीर्थ यात्री आते हैं। मैहर का उस्ताद अलाउद्दीन खां के कारण भारतीय शास्त्रीय संगीत में भी महत्वपूर्ण स्थान है। उस्ताद अलाउद्दीन खां को बाबा के नाम से भी पुकारते है। उनके द्वारा निर्मित वाद्य वृंद को मैहर बैंड भी कहा जाता है। 

मैहर में राज्य के किसी भी पर्यटन स्थल में आने वाले यात्रियों की तुलना में सर्वाधिक यात्री आते हैं। वर्ष 2018 में मैहर में 10650000 पर्यटक आए यह सभी भारतीय ही थे। यहां इस वर्ष किसी विदेशी पर्यटक की उपस्थिति दर्ज नहीं की गई। 

दरअसल मैहर आने वाले लगभग सभी यात्री धर्मयात्री होते हैं जो यहां स्थित मां शारदा के मंदिर में दर्शन के लिए आते है।

माँ शारदा माता, मैहर, श्रेणी  ऐतिहासिक, धार्मिक..

पवित्र माँ शारदा मंदिर मध्य प्रदेश के सतना जिले के ग्राम मैहर में स्थित है। यह स्थान सड़क और ट्रेन मार्ग से जुड़ा हुआ है। सतना जिला मुख्यालय से अनुमानित दूरी 40 किलोमीटर है मंदिर त्रिकूट पर्वत पर 600 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। 

तीर्थ स्थल तक पहुंचने के लिए 1001 सीढ़ियों पर चढ़ना है। मंदिर का प्रबंधन माँ शारदा प्रबंधक समिति द्वारा किया जाता है। जिला कलेक्टर की अध्यक्षता वाली समिति ने देश भर से मंदिर में आने वाले तीर्थयात्रियों और भक्तों को बेहतर सुविधाएं प्रदान करने के लिए महत्वपूर्ण कार्य किया है।

सड़क मार्ग पहाड़ पर बनाया गया है ताकि वाहन को पहाड़ी के ऊपर ले जाया जा सके।

फोटो गैलरी: पर्वत जहां मंदिर की स्थापना हुई माता मैहर.. 

कैसे पहुंचें..

वायुमार्ग: मैहर तक पहुंचने के लिए निकटतम हवाई अड्डा, जबलपुर, खजुराहो और इलाहाबाद है। इन हवाई अड्डों से आप ट्रेन, बस या टैक्सी से आसानी से मैहर तक पहुंच सकते हैं। जबलपुर से मैहर दूरी 150 किलोमीटर, खजुराहो से मैहर दूरी 130 किलोमीटर, इलाहाबाद से मैहर दूरी 200 किलोमीटर.

ट्रेन द्वारा: आम तौर पर सभी ट्रेनों में मैहर स्टेशन पर रोक नहीं होती है, लेकिन नवरात्र उत्सवों के दौरान ज्यादातर ट्रेनें मैहर पर रुकती है। सभी ट्रेनों के लिए निकटतम रेलवे स्टेशन जंक्शन-सतना स्टेशन से मैहर स्टेशन की दूरी 36 किलोमीटर है, मैहर स्टेशन से कटनी स्टेशन की दूरी 55 किलोमीटर है.

सड़क मार्ग: मैहर शहर अच्छी तरह से राष्ट्रीय राजमार्ग 7 के साथ सड़क से जुड़ा हुआ है. आप आसानी से निकटतम प्रमुख शहरों से मैहर शहर के लिये नियमित बसें पा सकते हैं।