गुजरात के मोरबी में पिछले दिनों केबल पुल टूटने से 135 लोगों की मौत के पहले भी देश सड़के पुल आदि क्षतिग्रस्त होने से कई हादसे भोग चुका है। लेकिन केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्री नितिन गड़करी इससे समस्या से निपटने नयी तकनीक पर काम कर रहे हैं। गौरतलब है कि हादसे के बाद अक्सर सवाल उठते हैं कि पुल की मरम्मत और सुरक्षा का क्या प्रबंध था या पुल के कमजोर होने की जांच पहले क्यों नहीं की गई और क्या ऐसा कोई सिस्टम अपने देश में है जिससे पुल गिरने से पहले ही पता चल जाए?

दरअसल, गुजरात में विधानसभा चुनाव हैं और मोरबी हादसे को विपक्ष काफी उछल रहा है। ऐसे में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने अपने मेगाप्लान के बारे में बताया है कि मैंने ऑस्ट्रेलिया और दूसरे देशों में जाकर अध्ययन किया है। नासिक में हमारे लोगों ने एक रिसर्च किया है कि सभी पुलों को हम ऐसे सिस्टम से जोड़ देंगे कि दिल्ली में रखे हमारे कंप्यूटर को पहले ही पता चल जाएगा कि कौन सा पुल गिरने वाला है। कौन सा पुल कमजोर हुआ है।

ट्रेन में आगे लोग, पीछे भेड़-बकरी

पहाड़ों पर गोल-गोल घूमने वाले रास्ते से होकर लोग घंटों का सफर करके नीचे आने की कठिनाई पर गडकरी ने बताया कि हम हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू कश्मीर जैसे पहाड़ी प्रदेशों के लिए नए मॉडल पर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहाड़ से लगकर ऐसी रेलवे लाइन डाली जाएगी कि डब्बे में ऊपर के पार्ट में लोग बैठेंगे और नीचे के पार्ट में भेड़-बकरी, सब्जी, फल-फूल रहेगा। जिसके लिए चार घंटा लगता है वो 20 मिनट में हो जाएगा। फ्यूल भी नहीं लगेगा, खर्चा भी कम होगा। लद्दाख और लेह में इसका पायलट प्रोजेक्ट चलने वाला है। इसके अलावा एक पहाड़ी से दूसरे पहाड़ी को जोड़ने के लिए केबल नेटवर्क पर भी काम किया जाएगा।

80 हजार पुल का रिकॉर्ड पूरा

गडकरी ने एक न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में बताया है कि हमने 80 हजार पुलों का रिकॉर्ड इकट्ठा किया है। इसे अभी 3-4 लाख ब्रिज का रिकॉर्ड तैयार करना है। अगर कमजोर या गिरने वाले पुल का पता चलता है तो तुरंत अलार्म बजेगा और फौरन राज्य सरकार और कॉरपोरेशन को सूचना दे दी जाएगी कि ये ब्रिज खराब है।

'नासिक में हमारे लोगों ने एक रिसर्च किया है कि सभी पुलों को हम ऐसे सिस्टम से जोड़ देंगे कि दिल्ली में रखे हमारे कंप्यूटर को पहले ही पता चल जाएगा कि कौन सा पुल गिरने वाला है।'