भोपाल: राज्य के उच्च न्यायालय द्वारा छह साल पहले बने मप्र मध्यस्थता नियम 2016 में बदलाव किया जा रहा है तथा इसका ड्राफ्ट जारी कर दिया गया है। इसमें मध्यस्थता शुल्क बढ़ाया जा रहा है।
पहले मध्यस्थता के माध्यम से समझौता होने पर शुल्क 3 हजार रुपये से बढ़ाकर पांच रुपये होगा तथा सम्बध्द प्रकरण में एक हजार रुपये प्रति प्रकरण अधिकतम 3 हजार रुपये होगा जो पहले 500 रुपये था।
इसी प्रकार कोई समझौता न होने की दशा में (तीन प्रभावी सुनवाईयों के बावजूद पक्षकारों के किसी सौहर्दपूर्ण समझौते पर पहुंचने में असफल रने की दशा में) शुल्क ढाई हजार रुपये लगेगा जो पहले एह हजार रुपये था।
उल्लेखनीय है कि न्यायालय में अनेक प्रकरण दोनों पक्षकारों में समझौता कर सुलझाये जाते हैं जिनके लिये मध्यस्थ नियुक्त किये जाते हैं। इन्हीं मध्यस्थतों को इस शुल्क का भुगतान किया जाता है। बढ़ा हुआ शुल्क आगामी 10 सितम्बर के बाद प्रभावशील कर दिया जायेगा।