भोपाल: 'लाड़ली लक्ष्मी-दो' के शुभारंभ कार्यक्रम में अपर मुख्य सचिव अशोक शाह के प्रदेश में बच्चों को जन्म देने के बाद महिलाओं के स्तनपान को लेकर की गई टिप्पणी उनके लिए भारी साबित हो रही है. पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती, पूर्व महिला बाल विकास मंत्री सुश्री कुसुम मेहेंदले और रंजना बघेल के बाद अब प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष गिरीश गौतम ने उन पर तंज कसा है कि कहीं वे पश्चिम देश से तो लौटकर नहीं आए.
पश्चिम देशों में ही माताएं बच्चों को अपना दूध नहीं पिलाती हैं. इस बयान के बाद महिलाओं में आक्रोश है. उनके खिलाफ उठते विद्रोही स्वर को देखते हुए उन्हें महिला बाल विकास विभाग से हटाए जाने के संकेत मिलने लगे हैं.
भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के मध्य प्रदेश संवर्ग के 2021 बैच के परीविक्षाधीन अधिकारियों के विधानसभा में शनिवार को स्पीकर गिरीश गौतम से मिलने पहुंचने के बाद गौतम ने मीडिया से चर्चा में यह बात कही. गौतम ने परीविक्षाधीन अधिकारियों को समझाइश दी कि भारतीय संस्कृति को समझने की बात है.
संस्कृति बनती है संस्कार औऱ परंपराओं के मेल से..! भारतीय दर्शन में तीन चीजें हैं- प्रकृति, विकृत संस्कृति. प्रकृति के बारे में गौतम ने कहा कि इसमें दोहन की बात कही जाती है न कि शोषण की. जिस तरह गाय दूध देती है तो वह जितना दूध दे रही है उतना ले लें और छह घंटे बाद फिर देगी.
विकृति में शोषण है यानी दूसरे को कुछ नहीं मिले, भले ही हमें मिले या नहीं मिले. संस्कृति यह होती है कि पहले आप प्राप्त कर लो और जो कुछ बचा हो तो हम प्राप्त कर लेंगे. यही भारतीय संस्कृति है. इसीलिए बच्चों को जन्म देने के बाद पश्चिम देशों में महिलाएं अपना दूध नहीं पिलाती हैं क्योंकि वहां की संस्कृति अलग है लेकिन हमारी संस्कृति में ऐसा नहीं है.