सरकारी कामकाज लोगों के हिसाब से वैसे भी बड़ा अजब-ग़जब होता हैं. देश का दिल कहे जाने वाले मध्य प्रदेश के ग्रामीण अंचलों में आज भी कई जगहों पर पक्की सड़क मानो एक सपना हो..! कई बार अधिकारियों और नेताओं द्वारा सड़क की आस उनके अंदर एक नई ऊर्जा तो भर देती है लेकिन समय के साथ ये सिर्फ़ एक सपना ही बनकर रह जाती हैं.
कड़ी मशक्त के बाद कुछ जगहों पर सड़क बनती भी है तो उसकी हालत का अंदाजा होते ही विकास के दावे फेल नजर आने लगते हैं. वैसे एक कहावत तो आपने सुनी ही होगी कि 'नई सड़क पर भारी वाहन मत चलाइयेगा नहीं तो सड़क ख़राब हो जाएगी'.
आजकल ग्रामीण अंचलों में बनने वाली सड़कें एक दो दिन में ही वाहनों के बजाय हाथ से ही उखड़ने लग जाती है. एक ऐसा ही मामला एमपी के छतरपुर से सामने आया है.
छतरपुर जिले के हरपालपुर में ग्राम पंचायत सरसेड़ से चपरन गांव तक आजादी के बाद पहली बार करीब 2 करोड़ की लागत से 3.7 किलोमीटर की सड़क पीएम ग्राम सड़क योजना के तहत बनी थी. निर्माण के 3-4 दिनों बाद से ही हाथ लगाते ही सड़क पर लगा डामर उखड़ने लगा.
इस मामले में बड़ी ही दिलचस्प बात यह है कि सड़क निर्माण की निगरानी कर रहे लोक निर्माण विभाग के उपयंत्री, ठेकेदार व सब इंजीनियर के सामने जब ग्रामीणों ने हाथों से डामर उखाड़ कर शिकायत दर्ज करवाई तो अधिकारियों ने गुस्से में ग्रामीणों का मोबाइल तक छीनने का प्रयास किया. उसके बाद अधिकारियों और ग्रामीणों के बीच बहस शुरु हो गई. यह वायरल वीडियो चपरन गांव का हैं.
जिसके बाद ग्रामीण अधिकारियों पर बरस पड़े और मोबाइल से वीडियो बनाकर उसे वायरल कर दिया. वायरल वीडियो में आप देख सकते हैं कि कैसे कुछ लोग अधिकारियों से बहस कर रहें है. साथ ही हाथ से नई सड़क को उखाड़कर अपनी आपत्ति दर्ज कराते नजर आ रहें हैं.
विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच करीब 76 साल बाद गांव वालों का पक्की सड़क का सपना सच तो हुआ लेकिन भ्रष्टाचार नामक दीमक ने इस नई सड़क को एक दो दिन में ही पूरी तरह से खत्मः कर विकास के दावों को जमीनी स्तर तक खोखला कर दिया.