भारतीय लोकतंत्र सभी धर्मों को मानने की स्वतंत्रता देता है. कोई भी व्यक्ति अपनी आस्था के अनुसार हर धर्म को अपना सकता है या फिर किसी भी देवी-देवता की पूजा कर सकता है.
इसके लिए संविधान भी विशेष अधिकार प्रदान करता है. पर इन सबके बावजूद भी छत्तीसगढ़ से बौद्ध सम्मेलन का एक ऐसा वीडियो सामने आया है जिसमें हिंदू धर्म को टारगेट कर देवी-देवताओं का अपमान किया गया.
न्यूज़ एजेंसी ANI के अनुसार, सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में राजनांदगांव ज़िले में बौद्ध सम्मेलन के एक कार्यक्रम में इकट्ठा हुए लोगों को हिंदू देवी-देवताओं को ना मानने की शपथ दिलाई गई. लेकिन दिलचस्प बात यह भी है कि इस कार्यक्रम में महापौर हेमा देशमुख भी मौजूद थीं.
वीडियो में देखा जा सकता है कि कुछ लोग साफ तौर पर यह शपथ दिला रहे हैं कि गौरी, गणपति इत्यादी हिंदू धर्म के किसी भी देवी-देवता को नहीं मानूंगा और ना ही उनकी कभी पूजा करूँगा. मैं इस बात पर कभी विश्वास नहीं करूँगा कि ईश्वर ने कभी अवतार लिया हैं. फ़िलहाल ये वीडियो तेज़ी से वायरल हो रहा है.
अब सवाल यह उठता है कि क्या संविधान भी इस तरह किसी भी धर्म या फिर देवी-देवताओं को बदनाम करने की अनुमति देता है या नहीं? अगर नहीं, तो फिर इस तरह के आयोजनों पर बैन क्यों नहीं लगाया जा रहा है? जो धर्म की आड़ में लोगों की आस्था के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं. शासन और प्रशासन की मौजूदगी के बाद भी ऐसे कार्यक्रमों के लिए अनुमति कैसे मिल जाती है ये अब सोचने पर मजबूर कर रहा हैं.
इस आपत्तिजनक वीडियो के वायरल होने के बाद महापौर हेमा देशमुख ने अपनी सफाई में ANI से कहा कि वह एक राज्य स्तरीय बौद्ध सम्मेलन था जिसमें मैं विशेष अतिथि के रूप में मौजूद थी. इस कार्यक्रम में बाबा साहब अंबेडकर के पौते भी उपस्थित थे.
कार्यक्रम में अचानक शपथ लेने की बात तय हुई. हमें शपथ कार्यक्रम की जानकारी नहीं थी. उन्होंने जब भगवान के बारे में अपमानजनक और उल्टी-सीधी बातें कही तो मैंने शपथ नहीं ली और तुरंत उस कार्यक्रम से चली गई. मैं हिंदू धर्म से जुड़ी हूं इसलिए मुझे अच्छा नहीं लगा कि भगवान का अपमान हुआ है.