भोपाल: प्रदेश के छिन्दवाड़ा जिले की सौंसर तहसील में बन रहे स्पेशल इकोनामिक जोन-एसईजेड का काम फारेस्ट क्लीयरेंस न मिलने पर रुका पड़ा है। निजी क्षेत्र इसमें अब तक करीब साढ़े तीन सौ करोड़ रुपये व्यय कर चुका है। फारेस्ट क्लीयरेंस न मिलने से इस एसईजेड में कोई उद्योग स्थापित नहीं हो पा रहा है।

उल्लेखनीय है कि उक्त एसईजेड को बनाने के लिये मप्र सरकार के उद्योग विभाग के उपक्रम एमपीआईडीसी ने निजी क्षेत्र की ज्वाईँट वेंचर वाली कंपनी छिन्दवाड़ा प्लस डेवलपर्स लिमिटेड से 27 अक्टूबर 2007 को एमओयू किया था। इसका उद्देश्य इस एसईजेड में उद्योगों के लिये सभी सुविधाओं से युक्त भूमि तैयार करना था जिससे इसमें उद्योग सरलता से अपना उद्योग स्थापित कर सकें एवं क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ें एवं आर्थिक गतिविधियों में वृध्दि हो।

उक्त एसईजेड 1320 हैक्टेयर में विकसित होना है। परन्तु इसमें भूमि चक वाली अर्थात कन्टीज्युअस नहीं है और बीच-बीच में वन भूमि आ रही है। इस वन भूमि को प्राप्त करने के लिये कंपनी ने राशि जमा करा दी है परन्तु केंद्रीय वन मंत्रालय ने कई माह बीत जाने के बाद भी अब तक क्लीयरेंस नहीं दी है। इस मामले में वर्तमान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान एवं पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ भी कई बार केंद्रीय वन मंत्रालय से क्लीयरेंस देने का आग्रह कर चुके हैं। सौंसर के विधायक विजय रेवानाथ चौरे ने इस मामले को विधानसभा में उठाया था जिस पर उन्हें अब तक फारेस्ट क्लीयरेंस न मिलने का जवाब उद्योग विभाग ने दिया है।

कंपनी के एक अधिकारी ने बताया कि हम हर सप्ताह केंद्रीय वन मंत्रालय नई दिल्ली में क्लीयरेस के लिये चक्कर लगा रहे हैं। काफी समय बीत चुका है तथा हताशा भी हो रही है। बहुत सारा धन भी इसमें लगाया जा चुका है। क्लीयरेंस मिले तो वहां महाराष्ट्र से ही कई उद्योगपति उद्योग लगाने के लिये आ जायेंगे।