बुरहानपुर. सरकारी अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ शकील अहमद ने कोरोना काल में मिले फंड और मरीजों के लिए आए पैसों की जमकर बंदरबांट की। इस मामले में पुलिस ने 15 लोगों को आरोपी बनाया है जिनमें से 12 लोग गिरफ्तार किए चुके हैं। पुलिस ने तत्कालीन सिविल सर्जन अहमद को भी गिरफ्तार किया है। मामला जिला अस्पताल का है।
पुलिस ने बताया कि डॉ प्रतीक नवलखे के कहने पर सिविल सर्जन डॉ शकील अहमद लोगों के अकाउंट्स खुलवाता और पैसों को ठिकाने लगवाता। दोनों ने कई लोगों के नाम से बैंक अकाउंट खोल रखे थे। पता चला कि इन्होंने कोरोनाकाल और रोगी कल्याण समिति का पैसा अपने अकाउंट में ट्रांसफर करा लिया था। इस घोटाले में कई डॉक्टर, पत्रकार, नेता, मंडी कर्मचारी और अस्पताल के बाबू भी शामिल थे। इन्होंने फर्जी कंपनियां बनाईं। उनके नाम पर पैसा निकाल लिया गया। पुलिस ने आरोपियों के पास से करीब 5 करोड़ की नकदी और अन्य संपत्ति भी जब्त की है। इसी दौरान डॉ नवलखे ने करीब 25.30 लाख रुपए जुए में उड़ा दिए।
जांच में पता चला है कि दोनों डॉक्टर्स सहित अन्य आरोपियों ने स्वीपर्स के भी फर्जी अकाउंट बनाए थे। इसके बाद उन खातों में पैसे भी डाले। खातों में लाखों के ट्रांजेक्शन किए। पर्सनल अकाउंट और तत्कालीन सिविल सर्जन के अकाउंट में भी सीधे पैसा गया। दोनों आरोपियों ने नेशनल हेल्थ और रोगी कल्याण समिति का पैसा भी खा लिया। पुलिस का कहना है कि सिविल सर्जन समेत 15 आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। 15 दिन पहले टीम ने नवलखे को गिरफ्तार कर लिया। बाद में सिविल सर्जन समेत कुल 12 आरोपियों को अब तक गिरफ्तार किया है। 3 आरोपी अब भी फरार हैं।