आदिवासियों के लिए 26 साल पहले बने कानून का हाल में मप्र में शुरू हुआ क्रियान्वयन सही तरीके से कराने के सिलसिले में आज मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अफसरों की क्लास ली। प्रशासन अकादमी में कार्यशाला के दौरान उन्होंने कहा कि पेसा कानून महज कर्मकांड नहीं पैसा, इससे जनजातीय वर्ग का जीवन बदलेगा। इसके लिए नौकरशाही का माइंडसेट बदलना आवश्यक है क्योंकि संपन्न वर्ग अलग दुनिया बना लेता है। पिछड़े लोग अधिक पिछड़ते जाते हैं।

यह स्थिति बदलनी होगी। उन्होंने कहा कि आज भी भारिया जनजातीय सस्ते दाम पर चिरौंजी बेचने को विवश होते हैं। उनका शोषण नहीं होना चाहिए। राज्य शासन के मंतव्य के अनुसार पेसा नियम का संदेश और जानकारी लोगों तक पहुंचाएं। कमजोर वर्ग, गरीबी के आधार पर लाभ के पात्र हैं। इनका हक हड़पने वालों को नेस्तनाबूद करें तथा दोषी लोगों को नौकरी से बाहर कर जेल भेजें। अधिकारियों, कर्मचारियों में क्षमता है, कार्य करके दिखाएं। 

31 दिसंबर तक लक्ष्य

इस मौके पर शिवराज ने कहा कि आगामी 31 दिसंबर तक निर्धारित कार्य पूर्ण किए जाएं। ग्राम सभाएं जरूरी कार्यवाही पूरी करें। सभी विभाग संवेदनशील होकर जुटें। पेसा को सोशल मीडिया से प्रचारित करें। 4 दिसंबर को टंट्या मामा जनजातीय नायक की स्मृति में नेहरू स्टेडियम इंदौर में कार्यक्रम की तैयारी की जा रही है, इसमें व्यापक भागीदारी रहेगी।

89 ब्लॉक में आदर्श बनेगा मध्यप्रदेश

सीएम ने कहा कि जल, जंगल, जमीन के अधिकार दिलवाने सक्रिय हो जाएं। प्रशासनिक अमला सकारात्मक मानसिकता बनाएं, नियम समझाएं,मास्टर ट्रेनर बनकर काम करे। क्योंकि मास्टर्स ट्रेनर्स नींव के पत्थर हैं। साथ ही पेसा एक्ट सरल भाषा में समझाएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिलों के वनमंडलाधिकारी भी सक्रिय हों। किसी को कोई भ्रम नहीं रहना चाहिए। सिर्फ ग्रामीण क्षेत्र के जनजातीय बहुल ग्रामीण की ग्राम सभा, जिनमें अन्य पिछड़ा वर्ग के सदस्य भी शामिल हैं, वे अधिकार संपन्न होकर कार्य करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह नियम किसी के विरोध में नहीं हैं। आवश्यक जानकारी संबंधित विभागों और अमले को दी जा रही है। राजस्व, वन, जल संसाधन, कृषि, आबकारी आदि की महत्वपूर्ण भूमिका है।