पोषण आहार पर कैग की रिपोर्ट को लेकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को विस्तार से बयान दिया। विधानसभा परिसर में उन्होंने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश के महालेखाकार ने वर्ष 2018 से वर्ष 2021 के बीच महिला एवं बाल विकास विभाग के कतिपय कार्यालयों का आडिट किया था। आडिट के आधार पर महालेखाकार ने अपनी ड्राफ्ट रिपोर्ट विभाग को दिनांक 12 अगस्त, 2022 को भेजी है। इस ड्राफ्ट रिपोर्ट को ही अंतिम निष्कर्ष मानकर विगत कुछ दिनों से भ्रम की स्थिति पैदा करने का प्रयास किया जा रहा है। इस भ्रम को समाप्त करना आवश्यक है।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि सर्वप्रथम मैं सदन को ऑडिट की प्रक्रिया के बारे में जानकारी देना चाहता हूं। लोकतंत्र में कार्यपालिका, विधायिका के प्रति जवाबदेह होती है। विधायिका द्वारा जो बजट स्वीकृत किया जाता है, उसका सही उपयोग सुनिश्चित हो रहा है या नहीं, ये जानने के लिए सरकार की विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों के ऑडिट की एक संस्थागत व्यवस्था बनाई गई है। ऑडिट की ये प्रक्रिया कोई नई प्रक्रिया नहीं है। ऑडिट हर वर्ष होता है और हर विभाग में होता है।
मध्यप्रदेश में सरकार के प्रयासों से कुपोषण कम हो रहा है। लेकिन आज कांग्रेस इन सब बातों को सुनना नहीं चाहती थी। मैंने अपने वक्तव्य में सारी बातें विस्तार से कहीं हैं। कांग्रेस चर्चा से भागी। कांग्रेस को केवल हंगामा खड़ा करना था। pic.twitter.com/adUsNB4a1G
— Shivraj Singh Chouhan (@ChouhanShivraj) September 14, 2022
महालेखाकार कार्यालय के ऑडिटरों की टीम विभागों में आती है और उनके द्वारा जो ऑब्जर्वेशन्स किए जाते हैं, उन्हें वह अपनी ड्राफ्ट रिपोर्ट में शामिल कर विभाग को भेजते हैं। महालेखाकार कार्यालय द्वारा अपने ऑब्जर्वेशन्स ड्राफ्ट रिपोर्ट के रूप में संबंधित विभागों को उनका अभिमत जानने के लिए भेजे जाते हैं। फिर संबंधित विभाग ड्राफ्ट रिपोर्ट में वर्णित तथ्यों का परीक्षण और सत्यापन करता है तथा अपना पक्ष महालेखाकार के सामने प्रस्तुत करता है।
विभाग से अभिमत प्राप्त होने के बाद समग्र रूप से विचार कर महालेखाकार द्वारा अपनी रिपोर्ट को अंतिम रूप देने की कार्यवाही की जाती है। विभाग के जिस अभिमत से महालेखाकार संतुष्ट हो जाते है, ऐसे ऑब्जर्वेशन अंतरिम रिपोर्ट से हटा लिये जाते हैं। इसके बाद महालेखाकार अपनी रिपोर्ट को अंतिम रूप देते हैं।
जिस रिपोर्ट को विपक्षी मित्रों द्वारा CAG (कम्पट्रोलर एण्ड ऑडीटर जनरल ऑफ इण्डिया) की रिपोर्ट बताया जा रहा है, वह दरअसल CAG की रिपोर्ट है ही नहीं। यह केवल एक ड्राफ्ट रिपोर्ट है, जो कि मध्यप्रदेश के महालेखाकार यानी AG ऑफिस द्वारा तैयार की गई है। इस ड्राफ्ट रिपोर्ट में जो पैरा लिखे गए है, वे AG ऑफिस के प्रारंभिक आब्जर्वेशन्स है।
महालेखाकार ने 2018 से 2021 के बीच महिला बाल विकास के कुछ कार्यों का ऑडिट किया, इसकी ड्राफ्ट रिपोर्ट है। इसको अंतिम नहीं माना जा रहा है। ऑडिट की प्रक्रिया को कांग्रेस के मित्र भी जानते होंगे। pic.twitter.com/jAiQ32QAyE
— Shivraj Singh Chouhan (@ChouhanShivraj) September 14, 2022
उन्होंने कहा कि हमारी सरकार का ये स्पष्ट मानना है कि भले ही सरकार किसी की भी रही हो, लेकिन ऑडिट दल द्वारा उल्लेखित किये गये सभी बिंदुओं पर बारीकी से जांच हो। इसीलिए विभाग ड्राफ्ट रिपोर्ट में उठाए गए सभी बिंदुओं का गंभीरतापूर्वक परीक्षण कर रहा है और हम सभी बिंदुओं पर महालेखाकार को तथ्यात्मक एवं युक्तियुक्त जवाब देंगे।
ड्राफ्ट रिपोर्ट का एक मुख्य बिंदु शाला त्यागी किशोरी बालिकाओं को लेकर है। रिपोर्ट में कहा गया है कि महिला एवं बाल विकास विभाग ने बेस लाइन सर्वे नहीं किया। साथ ही विभाग ने स्कूल में पढ़ाई नहीं कर रही किशोरी बालिकाओं की संख्या 36 लाख बताई, जबकि स्कूल शिक्षा विभाग के अनुसार यह आंकड़ा 9 हजार है। महिला एवं बाल विकास विभाग ने शाला त्यागी बालिकाओं की संख्या 5.51 लाख स्वीकार की है।
वास्तविकता यह है कि ऑडिटर ने जो 36 लाख का आंकड़ा बताया है, वो मध्यप्रदेश की 11 से 14 वर्ष की किशोरी बालिकाओं की कुल संख्या है, न कि शाला त्यागी बालिकाओं की। हमारी सरकार ने 11 से 14 वर्ष की किशोरी बालिकाओं का बेस लाइन सर्वे कर रिपोर्ट सितंबर, 2018 में भारत सरकार को भेजी थी। रिपोर्ट में किशोरी बालिकाओं की संख्या कुल 2 लाख 52 हजार थी। वर्ष 2018 से वर्ष 2021 की अवधि के लिए हितग्राही बालिकाओं की कुल संख्या 5.51 लाख ही है।