भोपाल : राज्य के खाद्य विभाग के पास होम डिलीवरी करने वाली ई-कामर्स कंपनियों के खिलाफ पिछले सात साल में नौ शिकायतें मिली हैं परन्तु इनमें से एक के भी खिलाफ कड़ी कार्यवाही नहीं हुई है।
प्राप्त अधिकृत जानकारी के अनुसार, सागर के हर्ष चतुर्वेदी ने खराब गुणवत्ता एवं स्वाद के संबंध में शिकायत की जिस पर विभाग ने नमूना लेकर राज्य खाद्य प्रयोगशाला में जांच हेतु भेजा तथा जांच में परिणाम मानक स्तर का पाया गया। इसी प्रकार, सतना के अभिषेक मिश्रा ने जोमेटो एप से रेस्टोरेंट ओम प्लाजा से ड्रीमलैंड थाली मंगवाई थी जिसमें खराब दुर्गन्धयुक्त चावल भेजने की शिकायत की, इस पर विभागीय अधिकारियों ने ओम प्लाजा रेस्टोरेंट का निरीक्षण कर चावल का नमूना जांच हेतु लिया एवं उसे जांच के लिये राज्य खाद्य प्रयोगशाला भोपाल भेजा गया जिसकी रिपोर्ट अब तक नहीं आई है।
इंदौर के राहुल चौहान ने वेज के स्थान पर नॉन वेज खाद्य पदार्थ देने की शिकायत की परन्तु खाद्य कारोबारी द्वारा स्वयं पोर्टल पर निराकरण अंकित कर शिकायत क्लोज करवा दी। इंदौर के ही अंतरिक्ष शाहवाल ने नॉन वेज खाद्य पदार्थ खाने के बाद उल्टी होने की शिकायत की जिस पर विभाग ने निरीक्षण एवं नमूना लेने की कार्यवाही की। इंदौर के ही आकांक्षा गोले ने खाद्य पदार्थ में कॉकरोच पाये जाने की शिकायत की जिस पर विभाग ने खाद्य प्रतिष्ठान पर निरीक्षण कर सुधार सूचना जारी की गई।
इंदौर के आदित्य सिरपुरकर ने खाद्य पदार्थ में अन्य बाहरी पदार्थ पाये जाने की शिकायत की जिस पर विभाग ने निरीक्षण एवं नमूना लेने की कार्यवाही की। इंदौर के महेन्द्र ने एक्सपायर्ड खाद्य पदार्थ देने की कम्प्लेन्ट की जिस पर विभाग ने निरीक्षण की कार्यवाही की। इंदौर की सुश्री दीपिका सिंह ने खाना अच्छा नहीं दिया कहकर रिफण्ड दिलवाने की शिकायत की जिस पर विभाग ने कहा कि रिफण्ड संबंधी कार्य विभाग के कार्यक्षेत्र से बाहर है तथा इसके लिये शिकायतकर्ता उपभोक्ता फोरम में जाये।
ग्वालियर के आयुष ने स्वीगी के माध्यम से खराब क्वालिटी के खाद्य पदार्थ स्टीम मेमोज एवं चटनी भेजे जाने की शिकायत की जिस पर विभाग ने स्टीम मेमोज एवं चटनी के नमूने लेकर प्रयोगशाला में भेजे जो अभी विश्लेषणाधीन हैं।
राज्य के खाद्य विभाग का कहना है कि जमेटो जैसी ई-कामर्स कंपनियों को केंद्र का एफएसएसएआई नई दिल्ली ऑनलाईन लायसेंस जारी करता। सेन्ट्रल लायसेंस होने के कारण इनके शहरों में रजिस्टर्ड आफिसों, मोबाईल नंबरों के बारे में जानकारी राज्य के खाद्य विभाग के पास नहीं रहती है परन्तु राज्य के गृह विभाग ने एफएसएसएआई नई दिल्ली को पत्र लिखकर इनकी जानकारी मांगी है।