गुजरात के मोरबी में रविवार शाम एक पुल दुर्घटना में लगभग 132 लोगों की मौत हो गई और 100 से अधिक घायल हो गए।
राज्य के गृह मंत्री हर्ष सांघवी ने सोमवार सुबह बताया कि मामले में आपराधिक मामला दर्ज कर लिया गया है और आईजीपी रैंक के अधिकारी के नेतृत्व में जांच शुरू कर दी गई है। उन्होंने कहा है कि सभी रात भर राहत कार्य में लगे रहे। घटना के बाद नौसेना, एनडीआरएफ, वायुसेना और सेना के जवान तुरंत मौके पर पहुंचे। 200 से अधिक कर्मी रात भर खोज और बचाव अभियान में लगे रहे।
कई लोग अभी भी लापता हैं, उन्हें खोजने के लिए बड़े पैमाने पर बचाव अभियान जारी है। मोरबी हादसे पर खुद गृह मंत्री अमित शाह बारीकी से नजर रखे हुए हैं। वह रात भर प्रधानमंत्री कार्यालय के संपर्क में रहे। गुजरात के मुख्यमंत्री और गृह मंत्री ने भी पूरे हालात का जायजा लिया और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को घटना की पूरी जानकारी दी गई। त्रासदी की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है गुजरात में न केवल पुलिस और स्थानीय गोताखोर बल्कि NDRF और भारतीय नौसेना के जवान भी बचाव अभियान में जुटे हैं।
गुजरात COO के अनुसार, भारतीय नौसेना के 50 कर्मियों के साथ NDRF की 3 टुकड़ी, बचाव और राहत कार्यों के लिए भारतीय वायुसेना के 30 कर्मियों के साथ सेना की 2 टुकड़ी और उन्नत उपकरणों के साथ दमकल की 7 टीमें राजकोट, जामनगर, दीव और सुरेंद्रनगर से आ रही हैं। मोरबी उनके साथ मोर्चा संभाल रहे स्थानीय लोगों ने कई लोगों को बचाया है। इसके अलावा SDRF की 3 और स्टेट रिजर्व पुलिस की 2 यूनिट भी बचाव और राहत कार्यों के लिए मोरबी पहुंच रही हैं। राजकोट सिविल अस्पताल में इलाज के लिए आइसोलेशन वार्ड भी बनाया गया है। ये टीम अब तक 170 लोगों को रेस्क्यू कर चुकी है।
NDRF के DIG ने कहा कि वडोदरा हवाईअड्डे से राजकोट हवाईअड्डे पर NDRF की दो और टीमें भेजी जा रही हैं।NDRF की टीम के साथ वायुसेना का एक विमान राहत कार्यों के लिए रवाना हो गया है। इसके अलावा जामनगर और आसपास के अन्य स्थानों पर बचाव कार्यों के लिए हेलीकॉप्टर तैयार रखे गए हैं।
इस बात का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि इस तलाशी अभियान में न सिर्फ वायुसेना शामिल रही है, बल्कि इसके सबसे खतरनाक गरुण कमांडो भी यहां सर्हैच ऑपरेशन में लगाए गए हैं। सेना के पैरा कमांडो और नौसेना के मार्कोस कमांडो की तरह ही गरुण कमांडो बहुत खूंखार होते हैं। इस बल का गठन वर्ष 2004 में किया गया था। इनकी ट्रेनिंग ऐसी होती है कि ये बिना कुछ खाए हफ्तों तक लड़ सकते हैं। इस समय जम्मू-कश्मीर में गरुड़ कमांडो की सबसे ज्यादा तैनाती होती है।