विधानसभा चुनाव में जीत सुनिश्चित करने के लिए कांग्रेस पंचायत प्रतिनिधियों के माध्यम से स्थानीय समीकरण जमाने के जतन कर रही है। निर्वाचित प्रतिनिधि और कम मतों के अंतर से पराजित होने वाले प्रत्याशियों को आगामी चुनाव की दृष्टि से प्रशिक्षित किया जाएगा। इसके लिए नवंबर के पहले सप्ताह में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ राज्य स्तरीय सम्मेलन करेंगे। इसमें इन्हें ग्रामीण क्षेत्रों की विधानसभा सीटों की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। जिन प्रतिनिधियों का प्रदर्शन छह माह में अच्छा रहेगा, उन्हें चुनाव भी लड़ाया जा सकता है।
प्रदेश में दस जिला और 65 जनपद पंचायत अध्यक्ष कांग्रेस समर्थित हैं। 230 सदस्यीय विधानसभा में डेढ़ सौ सीटें ग्रामीण क्षेत्र में आती हैं। कांग्रेस ने 2018 के विधानसभा चुनाव में अधिक तर सीटें ग्रामीण क्षेत्र में ही जीती थीं। इनमें 31 सीटें आदिवासी क्षेत्रों की थीं। जुलाई 2022 में हुए पंचायत चुनाव में कांग्रेस समर्थित दस जिला और 65 जनपद पंचायत अध्यक्ष चुने गए। 286 सदस्य निर्वाचित हुए। बड़ी संख्या में सदस्य कम मतों के अंतर से पराजित हुए। प्रदेश कांग्रेस ने आगामी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए चुने हुए पंचायत प्रतिनिधियों के साथ कम मतों के अंतर से पराजित हुए प्रत्याशियों को स्थानीय समीकरण साधने के काम पर लगाने का निर्णय किया है।
मतदाता सूची पर रखेगी नजर
अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव की मतदाता सूची के पुनरीक्षण का काम चार नवंबर से प्रारंभ हो रहा है। कांग्रेस इसके लिए खासतौर पर सतर्क है। इसमें मतदाताओं के नाम जोड़ने, हटाने और संशोधन की प्रक्रिया की जाएगी। इस काम पर नजर रखने के लिए प्रदेश कांग्रेस 65 हजार अभिकर्ता (एजेंट) नियुक्त करेगी। बताया जाता है कि मतदाता सूची में पात्रों के नाम सूची में जोड़ने के लिए आवेदन पत्र बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) को देंगे।
वहीं, अपात्रों के नाम पर आपत्ति भी उठाएंगे।दीपावली के बाद सभी जिलों में मतदान केंद्र अभिकर्ता नियुक्त कर जिला निर्वाचन अधिकारी को सूचना दी जाएगी। साथ ही इनके परिचय पत्र भी बनाए जाएंगे ताकि कार्य संपादन में इन्हें कोई परेशानी न हो । प्रदेश में नगरीय निकाय चुनाव के समय भोपाल, इंदौर, जबलपुर सहित अन्य जिलों में मतदाता सूची की गड़बड़ी की बात सामने आई थी।पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से गायब पाए गए थे और बहुत से मतदाताओं के केंद्र परिवर्तन सूचना दिए बना ही कर दिए थे।