सियासत में विरासत संभाले रखना बड़ी ज़िम्मेदारी भी होती हैं और बेशक, कठिन चुनौती भी..! वैसे बदलते वक्त के साथ सियासत भी बदलती है और तमाम चेहरे भी.. लेकिन सियासी गुणाभाग और समीकरणों के चलते कुछ ऐसी भी सीटें होती है, जिनकी ड्योढ़ी पर हर दौर में एक ही घर या परिवार का कब्ज़ा रहता हैं. धीरे धीरे यही कब्जा, विरासत का नाम ओढ़ लेता है.
विरासत किसी को भी तोहफ़े में नहीं बल्क़ि लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा बनकर जनता के आशीर्वाद से ही मिलती हैं. एक ऐसी ही सीट है उत्तर प्रदेश की मैनपुरी..! जो लोकसभा उपचुनाव के कारण काफ़ी चर्चा में हैं. वैसे ये सीट राजनीतिक नज़रिए से यादव परिवार की विरासत कहलाती हैं. जानिए क्यों?
नेताजी मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद खाली हुई मैनपुरी सीट के लिए समाजवादी पार्टी ने डिंपल यादव को टिकट दिया है. अब देखना ये होगा कि ससुर की विरासत को बहु आगे बढ़ा पाती हैं या नहीं? फ़िलहाल ये 8 दिसंबर को काउंटिंग के साथ ही तय हो पायेगा. इसके लिए वोटिंग 5 दिसंबर को होगी.
मैनपुरी सीट कैसे बनी विरासत-
अगर मैनपुरी के राजनीतिक इतिहास की बात करें तो इसी सीट से 1996 में मुलायम सिंह यादव लोकसभा पहुंचे थे. इसके बाद 1998-99 में सपा के टिकट पर बलराम यादव ने जीत हासिल की थी. फिर 2004 में मुलायम सिंह चुनाव जीते लेकिन सीएम बनने के कारण उन्हें ये सीट छोड़नी पड़ी. उसके बाद हुए उपचुनाव में धर्मेंद्र यादव ने जीत हासिल कर परिवार की विरासत को संभाले रखा.
मुलायम सिंह ने 2009 के लोकसभा चुनाव में फिर जीत हासिल कर सभी को चौंका दिया और अगला 2014 का चुनाव मैनपुरी और आजमगढ़ से लड़कर दोनों ही जगह सफल रहें लेकिन फिर बाद में मैनपुरी सीट छोड़ दी. जिस पर हुए उपचुनाव में तेज प्रताप यादव जीते थे.
मुलायम ने 2019 का लोकसभा चुनाव फिर मैनपुरी सीट से जीता लेकिन निधन के कारण ये सीट अब ख़ाली हो गई हैं. यादव परिवार की विरासत को संभाले रखने की बड़ी ज़िम्मेदारी अब डिंपल यादव पर हैं.
जमीन से सियासत तक का सफ़र-
22 नवम्बर 1939 को इटावा जिले के सैफई गांव में किसान परिवार के यहां मुलायम सिंह यादव का जन्म हुआ था. गरीब परिवार से आने वाले मुलायम ने जमीन से सफ़र शुरू कर सियासत ने वह मुक़ाम हासिल किया, जो कई नेताओं के लिए सिर्फ़ सपना ही बनकर रह जाता है.
समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव तीन बार यूपी जैसे बड़े राज्य के मुख्यमंत्री रहे हैं. जमीन से जुड़ा होने के कारण जनता उन्हें प्यार से नेताजी या फिर धरती पुत्र कहकर बुलाती थी. शायद जनता के इसी प्यार ने मैनपुरी सीट को यादव परिवार की विरासत बना दिया. अब देखना ये होगा है कि क्या नेताजी के जाने के बाद भी यादव परिवार अपनी विरासत बरक़रार रख पाता है या नहीं..?