कर्नाटक के मैसूर में पूर्व IB अधिकारी आरएन कुलकर्णी को कल किसी अज्ञात कार चालक ने टक्कर मार दी थी। अब उनकी मौत को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। कयास लगाए जा रहे हैं, कि यह हादसा नहीं बल्कि हत्या थी। दरअसल पुलिस ने CCTV फुटेज की जांच के दौरान ये पाया है, कि कार ने उन्हें जानबूझकर टक्कर मारी थी। शुक्रवार की सुबह वे मैसूर विश्वविद्यालय (गंगोत्री) में कंप्यूटर विज्ञान विभाग के पास टहलने के लिए निकले थे, तभी एक अज्ञात वाहन ने उन्हें टक्कर मार दी थी। इसके बाद उन्हें पास के ही एक अस्पताल ले जाया गया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया।
घटना को अंजाम देने वाले अज्ञात अपराधी वहां से भाग निकले थे। पुलिस ने इस मामले में पहले 'हिट एंड रन' का मामला दर्ज किया था। लेकिन, जब पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज देखा तो पता चला कि यह एक जानबूझकर किया गया कृत्य था। इसके बाद जयलक्ष्मीपुरम थाने में हत्या का मामला भी दर्ज किया गया है। हत्या के समय वह चल नहीं रहे थे, बल्कि सड़क के किनारे खड़े थे। कार में नंबर प्लेट भी नहीं थी।
मैसूर शहर के पुलिस आयुक्त ने कहा कि पुलिस ने आरोपी की गिरफ्तारी के लिए जांच शुरू कर दी है। जांच के लिए तीन वरिष्ठ अधिकारियों की टीम बनाई गई है। आरएन कुलकर्णी 23 साल पहले सेवानिवृत्त हुए थे। अभी यह पता नहीं चल पाया है कि हत्या निजी रंजिश के चलते हुई या फिर उनकी प्रोफेशनल लाइफ से जुड़ी कोई बात इसके पीछे है। घटना मानसगंगोत्री में शाम साढ़े पांच बजे हुई। आरएन कुलकर्णी ने 35 वर्षों तक 'जांच ब्यूरो' में सेवा की है।
उन्होंने 'फेसेस ऑफ टेररिज्म इन इंडिया' समेत 3 किताबें भी लिखी हैं, जो जिहाद की पोल खोलती हैं। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने उनकी पुस्तक का विमोचन किया था। शुरुआती दिनों में उन्होंने एक शिक्षक के रूप में काम किया। उन्होंने 'रॉ' (रिसर्च एंड एनालिसिस विंग) के साथ भी काम किया था। वह मैसूर के शारदादेवी शहर में रहते थे। वहीं मकान बनाने को लेकर उनका अपने पड़ोसी से भी विवाद था। इस मामले में उनके दामाद ने FIR भी की थी।