भोपाल: राज्य सरकार ने जल संसाधन विभाग के अंतर्गत रीवा जिले की त्यौंथर बहाव योजना में अत्यधिक विलम्ब करने पर इसे राष्ट्रद्रोह मानकर हैदराबाद की ठेकेदार कंपनी मेसर्स एचईएस इन्फ्रा प्रलि का पंजीयन निलम्बित कर उसे तीन साल के लिये ब्लेक लिस्ट कर दिया है जिससे अब यह कंपनी किसी अन्य टेण्डर में भाग नहीं ले पायेगी।
इस कंपनी को टर्नकी आधार पर जिला रीवा की त्योंथर बहाव योजना के अंतर्गत 37050 हैक्टेयर सिंचित कमाण्ड एरिया हेतु टमस मुख्य नहर की आरडी 9.6 किमी से 69.56 किमी, महान वितरक आरडी 0.00 से 47 किमी, चिल्ला शाखा नहर आरडी 0.00 से 23 किमी एवं इनकी वितरक, माइनर तथा सब माइनर नहरों का निर्माण एवं मिट्टी एवं स्ट्रक्चरों का कार्य सहित स्पेसीफिकेशन अनुसार एवं 3 वर्ष तक रखरखाव कार्य सहित ठेका 225 करोड़ 79 लाख रुपये में दिया गया था।
1 अक्टूबर.2013 को कंपनी ने अनुबंध किया तथा कार्य को पूर्ण करने की अवधि 36 माह वर्षाकाल सहित अर्थात् 30 सितम्बर 2016 तक थी। कंपनी के साथ 3 हजार हैक्टेयर अतिरिक्त कमाण्ड क्षेत्र विकसित करने के लिए 13 करोड़ 54 लाख रुपये का अतिरिक्त अनुबंध भी किया गया। इस प्रकार कंपनी को 40 हजार 50 हैक्टेयर क्षेत्र में कमाण्ड विकसित करना था एवं अनुबंधित राशि 239 करोड़ 33 लाख रुपये थी।
परन्तु कंपनी ने अनुबंध दिनांक 1 अक्टूबर 2013 से 9 वर्ष से अधिक की अवधि व्यतीत हो जाने के पश्चात् भी कार्य पूर्ण नहीं किया। जबकि अनुबंधित कार्य 3 वर्ष में पूर्ण करना था। कंपनी द्वारा अभी तक 40 हजार 50 हैक्टेयर के विरूद्ध केवल 15 हजार हैक्टेयर में सिंचाई रकबा विकसित किया गया। मुख्य नहर, उसकी माइनर नहरें एवं पक्की संरचनाओं का कार्य अधूरा होने के कारण शेष 25 हजार 50 हैक्टेयर क्षेत्र सिंचाई से वंचित है।
कंपनी ने समय से भुगतान न होना, कोरोना महामारी की आपदा तथा पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकति न होने की बात कही परन्तु उसे इसलिये मान्य नहीं किया गया कि करोना महामारी एवं पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति की अल्पावधि संविदाकार की अनुबंधित पूर्णता तिथि दिनांक 30 सितम्बर 2016 से लगभग 5 से 6 वर्ष पश्चात् घटित हुई। कार्य पूर्ण न होने से राष्ट्रीय कृषि उत्पादन में 1715 करोड़ रुपये की कमी कंपनी द्वारा कारित की गई है जो कि राष्ट्रद्रोह की श्रेणी में आता है।