भोपाल: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ड्रीम प्रोजेक्टों में से एक प्रोजेक्ट शहरों के नजदीक सिटी फॉरेस्ट के रूप में विकसित करना है. रतलाम में 40 हेक्टेयर भूमि पर सिटी फॉरेस्ट डेवलपर होने के बाद अब उस पर औद्योगीकरण का ग्रहण लग रहा है. सिटी फॉरेस्ट को बचाने के लिए पर्यावरणविद् डॉ.खुशाल सिंह पुरोहित ने सीएम से गुहार लगाई है. रतलाम डीएफओ ने भी इस मुद्दे पर खतों-किताबत शुरू कर दी है.

रतलाम से 4 किलोमीटर दूर 40 हेक्टेयर भूमि को सिटी फॉरेस्ट के रूप में डेवलप किया गया है. केंद्र सरकार की स्वीकृति के बाद ही यहां डेवलपमेंट का कार्य शुरू हुआ. इस भूमि को पूर्व कलेक्टर ने पर्यावरण बंकी के तहत वन विभाग को आवंटित किया था. इस आवंटन के बाद ही तत्कालीन डीएफओ बासु कनौजिया ने 'नगर-वन' विकसित करने का काम शुरू किया था. रतलाम का सिटी फॉरेस्ट पूर्ण रूप से विकसित हो गया है.

नदी के किनारे पर बने सिटी फॉरेस्ट के अंतर्गत छतरी, पैगोडा और वॉच टावर का निर्माण किया गया है. शहर के पर्यावरण प्रेमियों की आवाजाही बढ़ गई है. मौजूदा कलेक्टर और औद्योगिक घरानों का विकसित सिटी फॉरेस्ट पर वक्र दृष्टि पड़ गई है.
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कलेक्टर द्वारा प्रस्तावित औद्योगिक कॉरिडोर के दायरे में पर्यावरण पार्क, स्मृति वन और नगर-वन की भूमि को शामिल किया गया. इसे बचाने के लिए शहर के पर्यावरण प्रेमी और पर्यावरणविदों ने मोर्चा खोल दिया है. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर औद्योगिक कॉरिडोर के दायरे से सिटी फॉरेस्ट बचाने का आग्रह किया गया है.
इनका कहना है-
'रतलाम शहर में 8000 हेक्टेयर के लगभग लैंड बैंक है. बावजूद इसके, सिटी फॉरेस्ट भूमि को औद्योगिकरण के लिए अधिग्रहित करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है. औद्योगिकरण लैंड बैंक भूमि पर भी किया जा सकता है. सिटी फॉरेस्ट कलेक्टर द्वारा विनीत भूमि पर ही विकसित किया गया है.' (डीएस डोडवे, डीएफओ रतलाम)