हिंदी फिल्मों के सशक्त अभिनेता के तौर पर स्थापित मनोज बाजपेयी ने हाल ही में अपना 53वां जन्मदिन मनाया है। उनका जन्म बिहार के बेतिया में 23 अप्रैल 1969 को हुआ था। मनोज बाजपेयी बॉलीवुड के सबसे प्रयोगधर्मी अभिनेताओं में हैं, जिन्हें फिल्म जगत में अपने योगदान के लिए पद्मश्री से नवाजा जा चुका है। मगर उनके जन्मदिन पर एक दिलचस्प किस्सा फिर ताजा हो गया। जिसका जिक्र लेखक पीयूष पांडे ने उन पर लिखी बायोग्राफी कुछ पाने की ज़िद में किया है।

दरअसल ये किस्सा उनके नाम से जुड़ा है। मनोज बाजपेयी का नाम उनके पिता राधाकांत बाजपेयी ने रखा था। मनोज के जन्म के समय अभिनेता मनोज कुमार का हिन्दी सिनेमा में जलवा था। 'दो बदन', 'पत्थर के सनम' और 'उपकार' जैसी फिल्मों की धूम मची थी। मनोज के जन्म के साल पहले राधाकांत बाजपेयी पुणे फिल्म इंस्टीट्यूट में मनोज कुमार के साक्षात दर्शन भी। कुछ कर चुके थे।

राधाकांत चूंकि मनोज कुमार के जबरदस्त फैन थे तो उन्होंने अपने सबसे बड़े बेटे का नाम अपने चहेते अभिनेता के नाम पर ही मनोज रख दिया। बेटे को ये नाम पसंद नहीं आया लिहाजा मनोज जब बड़े हुए तो अपना नाम बदलकर समर रखने की सोचने लगे। बाजपेयी के हवाले से बायोग्राफी में पूरे किस्से का जिक्र है । थिएटर के ज़माने में नाम बदलने के बारे में दोस्तों को बताया तो पता लिा कि एक एफिडेविट बनवाना पड़ेगा। अखबार में विज्ञापन देने होंगे। यह सब कानूनी प्रक्रिया थी. उस वक्त पैसे नहीं थे तो ये कार्यक्रम स्थगित हो गया ।