भोपाल: राज्य सरकार अब निजी मेडिकल एवं पैरामेडिकल कालेजों के विद्यार्थियों की सरकारी अस्पतालों में इंटर्नशिप हेतु शुल्क लेगी। इसके लिये स्वास्थ्य आयुक्त डा. सुदाम पी खाड़े ने इस संबंध में सभी सीएमएचओ को निर्देश जारी कर दिये हैं।
जारी निर्देश में कहा गया है कि गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की प्रदायगी हेतु यह अत्यंत आवश्यक है कि स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं का क्लीनिकल प्रशिक्षण एवं एक्सपोजर समुचित हो। प्राय: यह परिलक्षित हुआ है कि प्रदेश के अशासकीय महाविद्यालयीन मेडिकल/पैरामेडिकल कोर्स के प्रशिक्षु छात्र-छात्राओं का क्लीनिकल प्रशिक्षण, संस्थागत अधोसरंचना की अपर्याप्तता के कारण उचित मानक एवं गुणवत्ता अनुरूप नहीं होता है।
ऐसी स्थिति में जहां एक ओर अकादमिक प्रशिक्षण पूर्ण करने के पश्चात् ऐसे छात्रों द्वारा प्रदायित सेवाओं का स्तर संतोषजनक नहीं होता है, वहीं दूसरी ओर, अशासकीय महाविद्यालयों के स्वयं के अस्पताल न होने से अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को व्यवहारिक ज्ञान अर्जित करने हेतु शासकीय अस्पतालों पर निर्भर रहना पड़ता है।
निर्देश में कहा गया है कि प्रदेश में अशासकीय महाविद्यालयों से अध्ययन प्राप्त दंत चिकित्सक, आयुष चिकित्सक, पैरामेडिकल छात्र-छात्राओं का प्रदेश के शासकीय चिकित्सालयों में क्लीनिकल प्रशिक्षण/ इंटर्नशिप के संबंध में ये मार्गदर्शी निर्देश दिए जाते हैं - एक, अशासकीय महाविद्यालय में स्वयं के अस्पताल के अभाव में दंत चिकित्सक, आयुष चिकित्सक, अन्य पैरोमेडिकल विधा के प्रशिक्षु/इंटर्न द्वारा शासकीय चिकित्सालयों में क्लीनिकल प्रशिक्षण/इंटर्नशिप के लिए निर्धारित शुल्क संबंधित शासकीय संस्था के रोगी कल्याण समिति के खाते में जमा किया जाएगा।
यह शुल्क 3 माह तक की प्रशिक्षण इंटर्नशिप हेतु 5000 रुपये, 3-6 माह तक की प्रशिक्षण इंटर्नशिप हेतु 10 हजार रुपये, 6-12 माह तक की प्रशिक्षण इंटर्नशिप हेतु 20 हजार रुपये प्रति इंटर्न होगा। दो, शासकीय चिकित्सालय में क्लीनिकल प्रशिक्षण/ इंटर्नशिप हेतु अशासकीय संस्थान/महाविद्यालय से एक शिफ्ट (प्रात: 8 बजे से दोपहर 12 बजे तक एवं दोपहर 2 बजे से सायं 6 बजे तक) में एक विधा में (दंत चिकित्सा/आयुष/पैरोमेडिकल विधा) 30 से अधिक प्रशिक्षुओं को अनुमति नहीं दी जाएगी।
तीन, इंटर्नशिप के दौरान अशासकीय महाविद्यालयों के प्रशिक्षु/इंटर्न को किसी भी प्रकार का स्टाईपेन्ड/भत्ता देय नहीं होगा। चार, प्रशिक्षण अवधि/ इंटर्नशिप निरन्तर एक ही बार में पूर्ण करना अनिवार्य होगा। पांच, इस इंटर्नशिप के शासकीय अस्पताल में सुविधा देने का नेशनल मेडिकल कमीशन से संबद्धता का कोई संबंध नहीं होगा एवं ना ही किसी प्रकार का इंटरप्रेटेशेन किया जाएगा।