एक बातचीत में अमृता खानविलकर कहती हैं कोई कलाकार एक दिन या एक रात में खुद को साबित कर लेता है तो उसके लिए चीजें वहीं खत्म नहीं हो जाती। उसको हर रोज तोड़ना-मरोड़ना पड़ता है। एक ओर जहां हिंदी फिल्में बॉक्स ऑफिस पर दर्शकों को आकर्षित करने के लिए मशक्कत कर रही हैं, वहीं 'राजी', 'सत्यमेव जयते' जैसी हिंदी फिल्मों में नजर आ चुकीं अमृता खानविलकर अभिनीत मराठी फिल्म 'चंद्रमुखी' 50 दिनों से ज्यादा बॉक्स ऑफिस पर टिकी हुई है।

इस बारे में से बातचीत में अमृता कहती हैं, 'कोई कलाकार एक दिन या एक रात में खुद को साबित कर लेता है, तो उसके लिए चीजें वहीं खत्म नहीं हो जाती। उसको हर रोज तोड़ना मरोड़ना पड़ता है, कुछ चीजें छोड़नी पड़ती है, कुछ आजमानी पड़ती है, तब जाकर वह लोगों के दिलों तक पहुंचता है। एक एक्टर की जिम्मेदारी लाखों करोड़ों लोगों के दिल में बसना है, उसके लिए वह जितनी मेहनत करेगा, उसका फल भी उतना ज्यादा मिलता है। मेरी मराठी फिल्म 'चंद्रमुखी' इतने मुश्किल दौर में भी 50 से ज्यादा दिनों से थिएटर में है।

रीजनल सिनेमा को इस मुकाम तक पहुंचाने के लिए हमने बहुत इंतजार किया है, आज जो प्रतिक्रिया मिल रही है, वह पांच साल पहले नहीं मिल रही थी। मैंने अक्षय कुमार सर की वह बात सुनी थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि यह गलती हमारी है, फरहान अख्तर ने भी कहा था कि आज दर्शक वर्ल्ड सिनेमा देख रहे हैं, इसलिए हमें अब ज्यादा मेहनत से तैयारी करनी होगी। हम दर्शकों को दोष नहीं दे सकते कि वह सिनेमाघरों तक नहीं आ रहे हैं। मैंने 'चंद्रमुखी' फिल्म का रिस्पांस देखा है, अगर उन्हें अच्छा कंटेंट देंगे, तो वह देखने आ रहे हैं। फिल्ममेकर, आर्टिस्ट को समझना होगा कि दर्शकों को क्या चाहिए।

हम फिल्में अपने होम थिएटर के लिए तो बना नहीं रहे हैं, दर्शकों के लिए ही बना रहे हैं। उनको क्या अच्छा लगता है, वह जानना हमारी जिम्मेदारी है। थोड़ा सा संतुलन बिगड़ा हुआ है, लेकिन सब ठीक हो जाएगा।'