प्रदेश में गिद्धों की गणना से पहले सर्वे शुरू हो गया है। जिसमें गिद्धों के रहवास स्थानों को चिन्हित किया जा रहा है, उसके बाद एक दिन एक ही समय में गणना की जाएगी। यह गणना फरवरी के पहले सप्ताह में होगी। उल्लेखनीय है कि पूर्व के वर्षों में गिद्धों की गणना प्रत्येक दो वर्ष में होती थी। गणना को तभी पूरा माना जाता था जब कुछ माह के अंतराल में दो बार गिद्धों को गिना जाता था। इसके बाद गिद्ध गणना एक बार की जाने लगी थी। इस वर्ष से होने वाली गिद्धों की गणना फिर से दो बार होगी।
दिसंबर के अंत तक पूरा होगा सर्वे
वर्तमान में जो सर्वे किए जा रहे हैं, उसके आंकड़े दिसंबर के अंत एकज़ाई कर लिए जाएंगे। पिछली बार 7 फरवरी 2022 को गिद्धों की गणना हुई थी। तब एक बार की गिनती में 9,448 गिद्ध मिले थे। गिद्धों की यह संख्या देशभर के राज्यों में सबसे अधिक थी। इस गणना के लिए वन विहार नेशनल पार्क भोपाल को नोडल बनाया है। पार्क के अधिकारियों ने बताया कि शुरुआत में जब गणना शुरू की गई थी तब दो बार ही होती थी लेकिन बीच में एक बार गणना को ही मान्य किया जाने लगा था। अब इस वर्ष से दो बार गणना कराएंगे। अधिकारियों के मुताबिक गिद्ध गणना के लिए पहली बार तकनीक की मदद ली जा रही है।
गणना मैनुअली ही होगी लेकिन उसमें गिद्धों से जुड़े साक्ष्य जैसे, फोटो, विष्ठा, उनके घोसले आदि को साफ्टवेयर में अपलोड किया जाएगा। इस आधार पर इनकी पहचान करने व इनकी प्रजाति की सटीक जानकारी प्राप्त करने में साफ्टवेयर मदद करेगा। अधिकारियों के मुताबिक राज्य स्तरीय प्रशिण के बाद संभाग व जिला स्तर पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यह काम अलग-अलग चरणों में चल रहा है। इसके लिए सभी जिले के डीएफओ व पार्क के फील्ड डायरेक्टर को जिम्मेदारी दी गई है।
कब-कब होगी गिनती: पहली बार गिनती के बाद दूसरी बार अप्रैल में यह गिनती होगी। दोनों ही दिन एक ही समय में प्रदेश भर के वन क्षेत्रों में एक साथ गिद्ध गिने जाएंगे। इसके लिए प्रदेश स्तर पर प्रशिक्षण दे दिया है। अब प्रदेश के टाइगर रिजवों व सामान्य वन मंडलों में उन क्षेत्रों का सर्वे किया जा रहा है, जहां गिद्ध पहले से पाए जाते हैं या जहां पाए जाने की संभावना है।