भोपाल: प्रदेश के वन क्षेत्रों में हाथियों के आवागमन से ग्रामीणों की हो रही जन-घर-फसल हानि को रोकने के लियें अब वन विभाग एक नई कार्ययोजना पर कार्य शुरु करने जा रहा है जिसके तहत प्रभावित क्षेत्रों में हाथी मित्र दल बनाये जायेंगे जिसमें संबंधित गांवों के चार-पांच युवाओं को प्रशिक्षण दिया जायेगा जो हाथियों के आने के पूर्व सूचना वनकर्मियों को देंगे तथा पटाखे आदि फोड़ कर हाथियों की दिशा को डायवर्ट करेंगे।
दरअसल सीएम ने पिछले दिनों हुई वन्य प्राणी बोर्ड की बैठक में जंगली हाथियों से जनहानि पर चिंता व्यक्त की थी तथा इसकी रोकथाम हेतु उचित रणनीति निर्धारित कर ठोस कदम उठाने के निर्देश दिये थे। इस हेतु गठित समिति ने भी अपने सुझाव दिये थे। अब इन पर अमल करते हुये वन विभाग ने कर्नाटक में दल भेजकर वहां हाथियों के प्रबंधन का अध्ययन किया है और मप्र में हाथियों के द्वन्द से निपटने के लिये कार्ययोजना बनाई है।
इस कार्ययोजना में वन विभाग के अंतर्गत अलग से बजट लाईन का प्रावधान किया गया है जो विधानसभा के वर्षाकालीन सत्र में पेश होने वाले पहने पूरक बजट में आयेगी। इसमें केंद्र सरकार भी 60-40 अनुपात में धनराशि देगा। कार्ययोजना के तहत प्रभावित वन क्षेत्रों के गांवों में हाथी मित्र दल बनाये जायेंगे। चूंकि हाथी मधु मक्खियों से डरते हैं, इसलिये इन गांवों में मधुमक्खी पालन पर जोर दिया जायेगा तथा इसके लिये सहायता भी दी जायेगी तथा मधुमक्खी के छत्ते हाथियों द्वारा तोडऩे पर उसकी क्षतिपूर्ति भी दी जायेगी।
इसी प्रकार, हाथी आवागमन वाले वन क्षेत्र में 200 हैक्टेयर क्षेत्र में हाथियों के स्थाई रहवास हेतु उसमें केले आदि भोजन की सामग्री उगाई जायेगी जिससे हाथी भोजन की तलाश में रहवासी क्षेत्रों में न जायें और कोई हानि न पहुंचायें। हाथियों को हांकने के लिये वनकर्मियों के दल बनाकर उन्हें प्रशिक्षित भी किया जायेगा।
कार्ययोजना में एक खास बात यह भी है कि जंगली हाथी प्रभावित वन क्षेत्रों के ग्रामों के कच्चे घरों को पीएम आवास योजना के तहत पक्के घरों में तब्दील किया जायेगा जिससे हाथी इन्हें तोड़ नहीं सकें। यह कार्ययोजना वन विभाग ने जारी कर दी है। उल्लेखनीय है कि वर्तमान में जंगली हाथी छत्तीसगढ़ के सरगुजा से मप्र के सीधी जिले में आ रहे हैं तथा वहां से शहडोल एवं उमरिया आदि स्थानों पर पहुंच रहे हैं।