भोपाल: जंगल महकमे में प्रधान मुख्य वन संरक्षक चितरंजन त्यागी सहित 4 आईएफएस अधिकारी सेवानिवृत्त हो गए. त्यागी के सेवानिवृत्ति के बाद विकास शाखा का प्रभार अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक यूके सुबुद्धि को दिया गया है. सुबुद्धि के पास पहले से ही दो-दो शाखाओं का प्रभार है. विभाग की सबसे महत्वपूर्ण शाखा "विकास" का प्रभार देकर वन बल प्रमुख आरके गुप्ता ने एपीपीसीएफ सुबुद्धि की अहमियत को बढ़ा दिया है.

31 अक्टूबर को सेवानिवृत्त होने वाले अधिकारियों में विकास शाखा के मुखिया एवं प्रधान मुख्य वन संरक्षक चितरंजन त्यागी, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (भू-अभिलेख) धीरेंद्र भार्गव,  एपीसीसीएफ एवं ग्वालियर सर्किल के पदेन वन संरक्षक विश्राम सागर शर्मा और रीवा सर्किल सीसीएफ आनंद कुमार सिंह शामिल हैं.

रिक्त हुए पदों पर पदस्थापना आदेश जारी नहीं होने स्थिति में वन बल प्रमुख गुप्ता ने अस्थाई रूप से प्रभार सौंपा है. मसलन, बांस मिशन सीईओ यूके सुबुद्धि के पास पहले से ही अनुसंधान एवं विस्तार शाखा का अतिरिक्त प्रभार है, बावजूद इसके उन्हें विकास शाखा का भी प्रभाव दे दिया गया है.

इसी प्रकार भू अभिलेख शाखा का अतिरिक्त प्रभार बीएस अन्नागिरी को दिया गया है जिनके पास पहले से ही आईटी शाखा जैसे महत्वपूर्ण काम है. दरअसल मुख्यालय में एपीसीसीएफ के कई पद खाली पड़े हैं जबकि इस पद के अधिकारियों को कैडर विरुद्ध फील्ड में पदस्थापना की गई है.

इसी प्रकार रीवा सर्किल का प्रभार रीवा का वर्किंग प्लान बना रहे हैं राजेश राय और ग्वालियर सर्किल का प्रभाव सीसीएफ पालपुर कूनो को अतिरिक्त रूप से सौंपा गया है. यहां यह भी उल्लेखनीय है कि राजेश राय मैनेजमेंट कोटे से रीवा सर्किल में ही अपनी पदस्थापना कराने के जोड़-तोड़ में लगे हैं.

इसी प्रकार महकमे में सबसे विवादास्पद आईएफएस अधिकारी टीएस सुलिया को ग्वालियर सर्किल में सीसीएफ के पद पर पदस्थ किए जाने के लिए राजनीतिक दबाव बनाया जा रहा है.