भोपाल: प्रदेश में उच्चर न्यायिक सेवा संवर्ग में अब चार पद शामिल होंगे। पहले सिर्फ तीन पद ही थे। इसके लिये राज्य सरकार ने विधानसभा के गत वर्षाकालीन सत्र में मप्र सिविल न्यायालय संशोधन विधेयक पारित किया था जिसे अब राज्यपाल की स्वीकृति मिलने से यह कानून के रुप में स्थापित हो गया है।

दरअसल पहले उक्त कानून में उच्चतर न्यायिक सेवा संवर्ग में तीन पद ही शामिल थे जिनमें शामिल थे : प्रधान जिला न्यायाधीश, जिला न्यायाधीश (प्रवेश स्तर पर) तथा जिला न्यायाधीश (चयन स्तर पर)। परन्तु कानून में संशोधन कर इसमें अब प्रधान जिला न्यायाधीश के बाद जिला न्यायाधीश (अधिसमय मान) भी जोड़ दिया गया है।

जजेस की पारिवरिक पेंशन बढ़ौत्तरी की :

इधर राज्य सरकार ने जजों की पारिवारिक पेंशन में बढ़ौत्तरी कर दी है। अब पारिवारिक पेंशन न्यायिक अधिकारी द्वारा सेवानिवृत्ति के समय आहरित अंतिम वेतन के 30 प्रतिशत से कम नहीं होगी। यह प्रावधान उन जजों के लिये लागू होगा जो 1 जनवरी 1996 के पश्चात तथा 1 जनवरी 2006 के पूर्व रिटायर हो गये थे और जिनकी पेंशन वर्ष 2010 में पेंशन पुनरीक्षित की गई थी और कर्नाटक मॉडल के अनुरुप पेंशन समेकित की गई थी। यह पारिवारिक पेंशन जनवरी 2006 की तुलना में 3.7 गुना अधिक होगी।