भोपाल: राज्य सरकार ने बुन्देलखण्ड पैकेज के तहत मिले कामों में अनियमितता करने वाले जल संसाधन विभाग के चौदह इंजीनियरों को दोषमुक्त कर दिया है। इन्हें वर्ष 2017 में आरोप-पत्र जारी किया गया था। ईएनसी ने ने दो आरोपी इंजीनियरों तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी एसपी पटैरिया एवं तत्कालीन उपयंत्री एके श्रीवास्तव को उत्तरदायी नहीं होना प्रतिवेदित किया।
शेष बारह इंजीनियरों यथा तत्कालीन कार्यपालन यंत्री एचडी कुम्हार, तत्कालीन कार्यपालन यंत्री दीपक सतपुते, तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी एके त्रिपाठी, तत्कालीन उपयंत्री एमसी आर्या, तत्कालीन उपयंत्री एससी माहौर, तत्कालीन उपयंत्री एमएस पवैया, सेवानिवृत्त तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी जेआर कनेरिया, सेवानिवृत्त तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी आरपी शर्मा, सेवानिवृत्त तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी एमएल जैन, सेवानिवृत्त तत्कालीन उपयंत्री एमएल गुप्ता, सेवानिवृत्त तत्कालीन उपयंत्री पीके अमर एवं सेवानिवृत्त तत्कालीन उपयंत्री एमके चौबे के विरुध्द वर्ष 2019 में विभागीय जांच बैठाई गई।
जांच में विभाग आरोप प्रमाणित करने में असफल रहा। कार्यों में जो कमियां आईं उन्हें वार्षिंक मरम्मत के दौरान दूर करते हुये सिंचाई का लाभ दिया गया। वर्ष 2014-15 में 6890 हैक्टेयर सिंचाई लक्ष्य के विरुध्द 7409 हैक्टेयर सिंचाई की गई एवं वर्ष 2015-16 में 7510 हैक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की गई।
प्रकरण में शासन को कोई वित्तीय हानि नहीं होना पाया गया। इसलिये अब राज्य शासन ने भविष्य में और सजगता से कार्यों को क्रियान्वित करने हेतु सचेत कर इन सभी इंजीनियरों को दोषमुक्त कर उनके प्रकरण खत्म कर दिये हैं। इससे इन सभी इंजीनियरों को सेवानिवृत्ति के पहले एवं बाद में मिलने वाले लाभ अब मिल सकेंगे।