बदलते मौसम के साथ मूड में भी बदलाव हम सभी महसूस करते हैं। लेकिन आखिर ऐसा होता क्यों है? इस बदलाव के पीछे कुछ वैज्ञानिक तथ्य छुपे हुए रहते हैं और इसका सीधा सम्बन्ध हमारे शरीर के तापमान, शारीरिक स्वास्थ्य और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ा होता है।
विज्ञान के अनुसार मौसम और वायुमंडलीय तापमान में परिवर्तन हमारे शरीर और उसके स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। एक शोध में मौसम और हमारे मूड यानी मानसिक स्वास्थ्य के बीच की एक कड़ी का पता चला है। जी हां, वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जलवायु परिवर्तन का हमारे मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ता है। जैसे-जैसे तापमान बढ़ता या घटता है, हमारे शरीर की कार्यप्रणाली बदल जाती है।
जैसे ब्लड सर्कुलेशन, ब्लड प्रेशर और मेटाबॉलिज्म। इसी तरह जलवायु परिवर्तन से मानसिक स्वास्थ्य और भी कई तरह से प्रभावित होता है, आइए जानें कैसे।
मौसम और मूड कनेक्शन - मौसम आपके मूड को कैसे प्रभावित करता है:
नेशनल वेदर सर्विस की ताजा एडवाइजरी के मुताबिक भीषण गर्मी में मूड कैसे बदलता है इस पर बात की गई। गर्मी में स्वास्थ्य विभाग में मानसिक विकारों की शिकायत करने वाले मरीजों की संख्या में इजाफा होता है। इसके अलावा, गर्मी कुछ समूहों को अलग तरह से प्रभावित करती है, जिनमें वे लोग भी शामिल हैं जो पहले से ही मानसिक और व्यवहारिक स्वास्थ्य स्थितियों से पीड़ित हैं। साथ ही गर्मी ने लोगों में डिमेंशिया के लक्षण बढ़ा दिए हैं। जैसे-जैसे गर्मी बढ़ती है, लोग और अधिक चिड़चिड़े और क्रोधित हो जाते हैं।
गर्मियों के दौरान खेले जाने वाले मैचों में लोगों के साथ दुर्व्यवहार अधिक देखा जाता है। इसके साथ ही खिलाड़ियों समेत आम लोग भी ज्यादा आक्रामक नजर आते हैं। वही शोध बताता है कि तापमान जितना अधिक होगा, लोगों के आक्रामक रूप से कार्य करने की संभावना उतनी ही अधिक होगी। गर्म वर्षों, महीनों, दिनों और दिन के समय में आक्रामकता की दर अधिक होती है, और इस समय हत्याओं, दंगों के लिए पैटर्न बदलते हैं।
शोध बताते हैं कि गर्मी और धूप के कारण मानसिक स्वास्थ्य और व्यवहार संबंधी समस्याएं होती हैं। दरअसल, गर्मी के कारण लगातार पसीने के कारण लोग डिहाइड्रेट हो जाते हैं और यह लोगों को अधिक थका हुआ और चिड़चिड़ा बना देता है। तापमान में उतार-चढ़ाव मूड को बदल सकता है और शरीर में कई समस्याएं पैदा कर सकता है।
पानी की कमी से ब्लड सर्कुलेशन और मेटाबॉलिज्म खराब हो जाता है। गर्मी और पानी की कमी से रक्त वाहिकाओं पर दबाव पड़ सकता है, जिससे हाई बीपी हो सकता है। सिरदर्द को ट्रिगर कर सकता है। आत्महत्या के मामले बढ़ सकते हैं। चिड़चिड़ापन और आक्रामकता लगातार बढ़ रही है। अवसाद और चिंता बढ़ सकती है। तो, इस तरह गर्मी आपके दिमाग और दिल दोनों को प्रभावित करती है। ऐसे में जरूरी है कि आप खूब पानी पिएं, खुद को हाइड्रेट रखें और भीषण गर्मी में घर से बाहर न निकलें।