पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस और पर्यटन राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की गिरती कीमतों का फ़ायदा तुरंत ग्राहकों को नहीं दिया जा सकता। उनके अनुसार, वैश्विक स्तर पर सस्ता तेल भारत तक पहुँचने में समय लगता है।

ईंधन की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी - लगभग ₹3.94 प्रति लीटर की वृद्धि - पर बात करते हुए केंद्रीय मंत्री गोपी ने कहा कि इस बढ़ोतरी को तुरंत वापस नहीं लिया जा सकता, भले ही वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें गिरी हों।

उन्होंने पत्रकारों से कहा, "इसमें समय लगेगा क्योंकि सस्ता कच्चा तेल होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के रास्ते भारत लाया जाता है, जहाँ जहाजों का भारी आवागमन होता है। इसलिए, हालात सामान्य होने की ज़रूरत है।"

उन्होंने आगे कहा कि इस साल फरवरी में पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद तेल कंपनियों को भारी नुकसान हुआ था, और केंद्र सरकार ने इसका असर काफ़ी हद तक खुद झेला।

गोपी ने कहा, "इस असर को झेलने से केंद्र को ₹12,000 करोड़ का नुकसान हुआ। किसी भी राज्य ने ईंधन की बढ़ी हुई कीमतों पर एक्साइज़ ड्यूटी कम करके अपना राजस्व नहीं घटाया। केंद्र सरकार को कदम उठाना है, और तेल कंपनियों का आर्थिक रूप से टिकाऊ रहना ज़रूरी है।"

भारत में पेट्रोल और डीज़ल की कीमतें सिर्फ़ कच्चे तेल की लागत पर आधारित नहीं होती हैं। इनमें रिफ़ाइनिंग की लागत, ढुलाई का खर्च, केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा लगाए गए टैक्स और डीलर कमीशन भी शामिल होते हैं।

भारत में कच्चे तेल का आयात और पेट्रोल व डीज़ल की सप्लाई मुख्य रूप से सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की तेल मार्केटिंग कंपनियों द्वारा नियंत्रित की जाती है। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम देश की सबसे बड़ी सरकारी कंपनियाँ हैं; वे कच्चे तेल का आयात करती हैं, उसे रिफ़ाइन करती हैं और पेट्रोल, डीज़ल और LPG की सप्लाई करती हैं। वहीं, रिलायंस इंडस्ट्रीज़ और नायरा एनर्जी निजी क्षेत्र की प्रमुख रिफ़ाइनिंग कंपनियाँ हैं।

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत में एक बार फिर पेट्रोल और डीज़ल की कीमतें बढ़ाई गई हैं। सरकारी तेल कंपनियों ने मई 2026 में तीसरी बार ईंधन की कीमतें बढ़ाई हैं। दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 87 पैसे बढ़कर ₹99.51 प्रति लीटर हो गई है, जबकि डीज़ल की कीमत 91 पैसे बढ़कर ₹92.49 प्रति लीटर हो गई है।