बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आठ साल पुराने इतिहास को दोहराने के मुहाने पर खड़े हैं। भाजपा जहां उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद के जरिये गठबंधन बचाने की अंतिम कोशिश कर रही है, वहीं जदयू राज्य के सभी विपक्षी दलों के संपर्क में है। मंगलवार को जदयू विधायकों और सांसदों की बैठक में अंतिम निर्णय हो सकता है। इसी वक्त राजद भी अलग बैठक करेगी। 

बिहार में तेजी से बदले राजनीतिक घटनाक्रम के बीच भाजपा-जदयू गठबंधन पर संकट के बादल हैं। वहीं, राजद और जदयू में नजदीकी भी बढ़ती दिख रही है। जदयू के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष आरसीपी सिंह के इस्तीफे के बाद गहमागहमी काफी तेज हो गई है। माना जा रहा है कि बहुत जल्द नए गठबंधन के साथ नई सरकार बन सकती है।

एक ओर जहां कांग्रेस हाथ आए इस मौके को लपक लेना चाहती है, मामले में कांग्रेस का अपना ही गणित है कांग्रेस विधायक शकील अहमद खान ने कहा कि महागठबंधन की सरकार बनाने का फैसला हो चुका है। वहीं जेडीयू सांसद कौशलेंद्र ने कहा कि जेडीयू को तोड़ने की कोशिश की जा रही है। 

तो वहीं भाजपा भी गठबंधन की सरकार को बचाने की आखिरी कोशिश कर रही है। इसके लिए भाजपा के राज्य महासचिव भीखूभाई दलसानिया और राज्य भाजपा प्रमुख संजय जायसवाल पटना में उप मुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद के आवास पर पहुंचे हैं।  

सूत्रों की मानें तो आरजेडी का एक उपमुख्यमंत्री और 16 मंत्री नीतीश सरकार में शामिल होंगे, वहीं भाजपा के विधायकों को मंत्रिमंडल से बाहर का रास्हता दिखाया जा सकता है। विश्वास मत हासिल होने के बाद ऐसा किया जा सकता है।  

ऐसा कहा जा रहा है, कि एक संक्षिप्त शपथ ग्रहण समारोह होगा जिसमें तेजस्वी यादव शपथ लेंगे बाद में मंत्रिमंडल का विस्तार होगा जिसमें आरजेडी कोटे के बाक़ी 15 शपथ लेंगे। बहुमत साबित होने के बाद मंत्रिमंडल विस्तार होगा । 

बात करें कांग्रेस की तो वो भी हाथ आए मौके को भुनाने में लगी है। कांग्रेस के सभी विधायक, वाम दल के सभी विधायक राबड़ी आवास जा रहे हैं। वहीं महागठबंधन की बैठक होगी। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार NDA से अलग होंगे तो हम लोग उनका समर्थन करेंगे। महागठबंधन नीतीश को ही मुख्यमंत्री बनाएगा लेकिन समर्थन हमलोग तब करेंगे जब वो NDA से अलग होंगे।