मध्यप्रदेश में मिशन-2023 की गूंज अब सुनाई देने लगी है। एमपी में कांग्रेस-बीजेपी का सीधा मुकाबला रहता है। इन दिनों दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष को लेकर काफ़ी कयासों का दौर चल रहा है। राजस्थान की बगावत के बाद अब अध्यक्ष पद की आस एमपी तक आ पहुंची है। इसके लिए कमलनाथ और दिग्विजय सिंह के नाम पर काफ़ी चर्चा भी है।
 
कमलनाथ के अचानक दिल्ली दौरे के बाद से कयासों का दौर और भी तेज है। दिल्ली से वापस भोपाल लौटने के बाद कमलनाथ ने मीडिया से चर्चा में कहा कि मैं दिल्ली गया था, मैंने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से साफ कहा कि मैं मध्यप्रदेश नहीं छोडूंगा, मैं एमपी से अपना ध्यान नहीं मोड़ना चाहता क्योंकि चुनाव के लिए रणनीति तैयार करना है।  


दिल्ली दौरे और राजस्थान में चल रहे सियासी बवाल पर कमलनाथ ने कहा कि मैं इनकी किसी भी गुटबाजी में नहीं पड़ना चाहता, मेरा तो एक ही लक्ष्य था कि मुझे इसमें न फसाया जाए।

कमलनाथ के इस बयान ने साफ कर दिया है कि वह अध्यक्ष पद की रेस में शामिल नहीं होंगे लेकिन दिग्विजय सिंह का नाम अभी भी इस रेस में बताया जा रहा है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, सियासी बवाल के बाद भी अशोक गहलोत इस रेस से बाहर नहीं बताए जा रहे हैं। 

 

फिलहाल एमपी विधानसभा चुनाव के लिए लगभग पूरा एक साल बाकी हैं लेकिन उससे पहले ही पार्टियां MP मिशन 2023 के चुनावी मोड में नजर आ रहीं हैं। पीएम मोदी का बीते एक महीने में एमपी का यह 11 अक्टूबर को उज्जैन में दूसरा दौरा रहेगा। साथ ही कांग्रेस भी चुनावी तैयारियों में जुट गई है। इस बार आम आदमी पार्टी की भी एंट्री विधानसभा चुनाव में तय मानी जा रही है।