वर्षा ऋतु में सावधानियां:
वर्षा ऋतु के आगमन से पहले कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए. टायफाइड, कॉलरा आदि से बचने के लिए टीके लगवा लेने चाहिए. छोटे बच्चों को पोलियो, खसरा, धनुर्वात, डिप्थीरिया, काली खांसी से बचाने के लिए दवा के साथ-साथ टीके लगवा लेने चाहिए.
• वर्षा के दिनों में शुद्ध जल का इस्तेमाल करें. हो सके तो पानी को पांच मिनट उबाल कर ठंडा करके पीएं.
• ठंडे खाद्य पदार्थों का सेवन न करें. जहां तक हो सके, गर्म और ताजा खाना ही खाएं. ठंडे पेय पदार्थों का इस्तेमाल न करें, इनसे संक्रमण होने की संभावना रहती है.
• वर्षा ऋतु में दही भी नहीं खाना चाहिए, क्योंकि इससे जीवाणु जल्दी पनपते हैं.
• खाद्य पदार्थों को जालीदार अलमारियों में बंद करके रखें. सड़क के किनारे मिलनेवाले कटे हुए फलों का उपयोग न करें.
• शरीर पर गीले कपड़े अधिक देर तक न पहन रखें. घर आते ही तुरंत बदल लें. गीले कपड़ों से ठंड लग सकती है.
• शरीर को स्वच्छ रखें. कम से कम दो बार साबुन लगाकर नहाना ठीक रहता है. पसीने की दुर्गंध और कीटाणुओं को धो डालने से त्वचा के रोग नहीं होते हैं.
• बरसात में चावल का सेवन कम से कम करें.
• उदर रोगियों को अदरक, मूली, लहसुन, हरी मिर्च को कूटकर उसमें नींबू निचोड़कर तथा काला नमक डालकर सेवन करना चाहिए.
• सप्ताह में एक बार उपवास रखने या कम खाने से संपूर्ण वर्षाऋतु में आप स्वस्थ रह सकते हैं.
• बरसात में जगह-जगह कूड़े के ढेर न लगने पाएं और न ही गड्डों में पानी जमा होने पाए, क्योंकि इससे मच्छर, मक्खियां, कांकरोच आदि पनपते हैं जो अनेक रोगों को उत्पन्न कर सकते हैं.