शाजापुर के लक्ष्मीनगर में मंगलवार को पशु प्रेम की अनूठी मिसाल सामने आई है। यहां पर एक गाय की अंतिम विदाई में पूरे इलाके के लोग भावुक हो गए। महिलाओं ने गाय को मां-बेटी की तरह ही विदाई दी। इस दौरान महिलाओं ने गाय के शव पर सौ से भी अधिक साड़ियाँ चढ़ाईं । साथ ही बैंड-बाजे के साथ अंतिम यात्रा भी निकाली गई। गौ माता के अंतिम दर्शनों के समय पूरे क्षेत्र में मातम छाया हुआ था। गाय पालक भंवरलाल के साथ ही क्षेत्र की महिलाएं भी विलाप करने लगीं।
रानू नाम की इस गाय की अंतिम विदाई ने पशु प्रेम की अनूठी मिसाल कायम की है। रानू इंसान नहीं थीं, लेकिन लोगों से उनका रिश्ता इंसानों जैसा था। वो सभी से प्यार करती थी, स्थिति ऐसी थी कि अगर पड़ोस में कोई उसे बेटी मानता, तो कई उसे एक माँ के रूप में मानते। यहां तक कि गौ माता रानू भी उन्हें हमेशा ममतामयी मां की तरह प्यार करती थीं। मंगलवार को हुई रानू की अंतिम विदाई में आंसुओं की बाढ़ आ गई। बच्चों से लेकर बड़े तक सभी बेहाल नजर आ रहे थे।
बैंड बाजे के साथ अंतिम यात्रा में सौ से अधिक साड़ियों पर माला व फूल चढ़ाए गए। गौ माता को नगर निगम के वाहन से श्मशान घाट ले जाया गया और पूरे संस्कार के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। भंवरलाल खिची ने उसका पालन-पोषण किया, लेकिन पूरे मोहल्ले के लोगों ने रानू से प्यार किया। भंवरलाल 20 साल तक गायों का पालन-पोषण कर रहे हैं।