मुंबई/भोपाल: "चिंगारी कोई भड़के तो सावन उसे बुझाएं, सावन जो आग लगाए तो उसे कौन बुझाएं..!" मशहूर गीत की ये पंक्तियां मध्य प्रदेश भवन मध्यालोक मुंबई के वर्तमान हालात पर एकदम सटीक बैठती है। मप्र पर्यटन विकास निगम द्वारा मेंटेन इस भवन की रेस्टोरेंट संचालक कंपनी ने मध्य प्रदेश की आन, बान और शान कहे जाने वाले मध्यलोक भवन मुंबई की प्रतिष्ठा धूमिल कर दी है, जिसे निगम ने ही अनुबंधित किया था, वही इसका बेड़ा गर्क करने पर तुली हैं।

विडम्बना देखिये कि जो सरकार मदिरापान और सामिष भोज का सदा से विरोध करती आई हैं, आज उसी सरकारी भवन के रेस्टोरेंट से यही सब खुलेआम परोसा जा रहा है और जिम्मेदार पर्यटन विकास निगम के अधिकारी खामोश हैं। यही नहीं पर्यटन विकास निगम के मुंबई स्टॉफ ने गलत का विरोध किया तो पिटाई का शिकार हो गए, और कम्पनी के मालिक का बाल भी बांका नहीं हुआ, क्योंकि रेस्टोरेंट के मालिक आला अधिकारियों के सेवादार जो ठहरे..! नतीजतन मुंबई में मध्य प्रदेश की शान शर्मसार हो रही है और भोपाल में किसी की पेशानी पर कोई बल नहीं आ रहा।

देश की औद्योगिक राजधानी मुंबई में मध्य प्रदेश की प्रतिष्ठा कहे जाने वाले मध्यलोक मप्र भवन में इन दिनों गुंडागर्दी मची हुई हैं। पर्यटन विकास निगम द्वारा संचालित इस आवासीय भवन में नागपुर बेस्ड कंपनी तुली हॉस्पिटैलिटी का नंगा नाच चल रहा है ,वैसे तो कंपनी को केवल रेस्टोरेंट चलाने के लिए निगम ने अनुबंध किया था, किंतु इस कंपनी ने जबरिया रेस्टोरेंट को अवैध रूप से मयखाना बना लिया है और खुलेआम बिना लाइसेंस के यहां से शराब बेची जा रही है।

यही नहीं तुली इंटरनेशनल ने अपने बाउंसर और स्टाफ को इसी फ्लोर पर बिना अनुमति के आवास की सुविधा भी दे डाली। सूत्रों के अनुसार, यहां तैनात पर्यटन निगम के प्रबंधक और कर्मचारियों के साथ कई बार अभद्रता और मारपीट की घटना होती हैं। विगत 26 जुलाई को भी ऐसी ही एक घटना ने जन्म लिया, जिसमें मध्यलोक भवन के प्रबंधक के साथ तुली इंटरनेशनल के लोगों ने गाली गलौच कर मारपीट की और पूरे परिसर में कोहराम मचा दिया।

डरे सहमे पर्यटन निगम के स्टाफ कर्मियों ने भोपाल मुख्यालय को संयुक्त हस्ताक्षर से पूरी घटना का विस्तृत ब्योरा प्रमाण सहित भेजा, जांच के लिए भोपाल से एसपी सिंह (जीएम ऑपरेशन) के.आर.शाद (जी एम पर्सनल), और इंदौर के क्षेत्रीय प्रबंधक एन.के.स्वर्णकार मुंबई पहुंचे, रस्मी तौर पर जांच की और उसी तुली हॉस्पिटैलिटी का भोजन पाकर वापस लौट आए, हालांकि स्वर्णकार ने इनका भोजन ठुकरा दिया।

बताया जाता हैं कि मुंबई स्थित मध्यलोक भवन में 26 जुलाई को तुली हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड के ऑनर युग तुली और मैनेजर निज़ाम मंसूरी, ने उनके बाउंसर ने साथ मिलकर मध्यलोक के प्रबंधक महेंद्र सिंह रैकवाल के साथ मारपीट इसलिए की कि वो रेस्टोरेंट के फ्लोर को उखाड़कर बिना अनुमति दूसरा कार्पेट फिट कर रहे थे। इस मारपीट की घटना से वहां अराजकता का माहौल बन गया, अन्य स्टाफ को भी परेशान किया गया।

घटना के ऑडियो वीडियो और फोटो मुख्यालय में सुरक्षित हैं, मगर मजाल हैं कि लगभग एक सप्ताह बाद भी घटना के दोषी पर कोई कार्यवाही नहीं हुईं हैं। दरअसल तूली हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड आदतन ऐसी ही घटनाओं को अंजाम देती रही है।

पहले भी पर्यटन निगम के अफसर इस कंपनी के शिकार बने, बावजूद इसके आखिर क्या वजह है कि पर्यटन निगम के आला अधिकारी इसी कंपनी के साथ अपने ज्वाइंट वेंचर करते आ रहे हैं। पूर्व एमडी रहे हरी रंजन राव ने छिंदवाड़ा और अन्य स्थानों पर ऐसी ही विवादास्पद कम्पनियों के साथ डील की थी, मुंबई में तुली इंटरनेशनल के स्थापित होने में भी राव की विशेष भूमिका रही है।