महाकाल लोक का आज लोकार्पण हो रहा है, जिसके चलते उज्जैन का महाकाल मंदिर देश-दुनिया में चर्चाओं में है। महाकाल मंदिर को लेकर लोगों में जिज्ञासा है और लोग महाकाल के बारे में ज्यादा से ज्यादा को आतुर दिखाई दे रहे हैं। इस बीच महाकाल ज्योतिर्लिंग से जुड़े एक तथ्य को केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने महाकाल लोक के लोकार्पण के अवसर पर शेयर किया है।
उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि “महाकालेश्वर मंदिर का इतिहास बहुत कम लोग जानते होंगे। सन 1235 में महाकालेश्वर मंदिर को दिल्ली के सुल्तान इल्तुतमिश ने पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया था। महाकाल ज्योतिर्लिंग को आक्रांताओं से सुरक्षित रखने लिए करीब 550 वर्षों तक पास ही के एक कुएं में छुपाया रखा।”
सिंधिया ने आगे लिखा कि मराठा शूरवीर श्रीमंत राणोजी राव सिंधिया ने मुग़लों को पराजित कर अपना शासन 1732 में उज्जैन में स्थापित किया था। राणोजी महाराज ने श्री बाबा महाकाल ज्योतिर्लिंग को कोटि तीर्थ कुंड से निकाल,महाकाल मंदिर का पुनः निर्माण करवाया और महाकाल ज्योतिर्लिंग को मंदिर दोबारा स्थापित किया। राणोजी राव सिंधिया द्वारा बनवाए महाकाल मंदिर का एक पुराना फ़ोटो साझा कर रहा हूँ। आज प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा "महाकाल लोक" का लोकार्पण इस ऐतिहासिक कथा की याद दिलाता है। जय बाबा महाकाल!
गौरतलब है कि पौराणिक कथाओं के अनुसार, महाकाल मंदिर की स्थापना द्वापर युग से पहले हुई थी। जब भगवान कृष्ण शिक्षा के लिए उज्जैन आए, तो उन्होंने महाकाल स्तोत्र गाया। गोस्वामी तुलसीदास ने भी महाकाल मंदिर का उल्लेख किया था। महाकाल उत्सव छठी शताब्दी में बुद्ध राजा चंद्रप्रद्योत के शासनकाल के दौरान हुआ था। यानी तब भी महाकाल का पर्व मनाया जाता था। इसका उल्लेख बान-भट अभिलेख में मिलता है।
राजमाता विजयाराजे सिंधिया ने अपनी आत्मकथा ‘राजपथ से लोकपथ पर’ में भी इस बात का ज़िक्र किया है। दिल्ली के सुल्तान इल्तुतमिश द्वारा उज्जैन पर आक्रमण के दौरान महाकाल मंदिर को ध्वस्त कर दिया गया था। उस समय पुजारियों ने महाकाल ज्योतिर्लिंग को कुंड में छिपा दिया था। इसके बाद औरंगजेब ने मंदिर के खंडहरों पर मस्जिद बनवाई। मंदिर के पुनर्निर्माण और ज्योतिर्लिंग को फिर से स्थापित करने से पहले रानोजी सिंधिया ने मस्जिद को ध्वस्त करवा दिया था।