भोपाल: धार जिले के मांडू तितली पार्क को लेकर पूर्व वन मंत्री उमंग सिंघार और वर्तमान वन मंत्री विजय शाह आमने-सामने आ गए हैं. वर्तमान और पूर्व मंत्रियों के तर्क ने व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिये हैं. विश्वप्रसिद्ध माण्डू में तितली पार्क बनने से पर्यटन और बढ़ता और निखरता. नौकरशाहों की लापरवाही और पक्ष-विपक्ष की राजनीति से माण्डू में तितलियों का आशियाना ही नहीं बन पा रहा है.
मप्र के धार जिले की पर्यटन नगरी माण्डू में बहुप्रतीक्षित तितली पार्क स्वीकृति के बाद भी नहीं बन सका है. तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने 78.67 लाख रूपये लागत राशि का तितली पार्क स्वीकृत किया गया था. तत्कालीन कांग्रेस सरकार में वन मंत्री रहे उमंग सिंघार का आरोप है कि तितली पार्क मवेशियों के लिये चारागाह में तब्दील हो गया है. सारे पौधे नष्ट होकर मैदान में तब्दील हो गये हैं. वहीं वन मंत्री कुं.विजय शाह का जवाब है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा तितली पार्क के निर्माण पर आपत्ति लिये जाने के कारण कार्य पूरा नहीं हो सकता है. इतना ही नहीं लाखों रुपये खर्च कर पार्क स्थल पर किया गया प्लांटेशन भी नष्ट हो गया है.
शाह ने किया अफसरों का बचाव-
गड़बड़ी करने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर सख्त रवैया अपनाने वाले वन मंत्री विजय शाह तितली पार्क में हुई पौधारोपण की गड़बड़ी में बचाव करते नजर आए. शाह ने माना कि तितली पार्क के स्थल निरीक्षण में रोपित 2750 पौधों में से 1307 पौधे जीवित पाये गये हैं. वन मंत्री का कहना है कि पौधरोपण में मौसमी पौधे होने व सिंचाई का प्रावधान नहीं होने से पौधे मर गये. इसके लिए कोई जिम्मेदार नहीं है.
लाख टके का सवाल क्यों खर्च हुए ₹1900000
धार से लेकर सतपुड़ा मुख्यालय में यह सवाल यक्ष प्रश्न बन गया है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने आपत्ति दर्ज कराई थी तब वन विभाग के अधिकारियों ने 19 लाख ₹20000 क्यों खर्च कर दिए? वन विभाग में तितली पार्क के लिए 76.67 लाख रुपए स्वीकृत किए थे. प्रथम किश्त 31 लाख 64 हजार 800 रपये राशि जारी की गई थी. इसमें 19.20 लाख से अधिक हो चुके हैं.
तितली पार्क के खर्च का ब्यौरा-
723 वर्गमीटर में तालाब किनारे फ्लेग स्टोन पेचिंग कार्य के लिए 2 लाख 34 हजार 926 रुपये, 5650 वर्गमीटर मे लैण्ड स्केपिंग कार्य के लिए 34 हजार 183 रुपये, 885 वर्गमीटर में फेंसिंग कार्य के लिए 76 हजार 301 रुपये, 500 वर्गमीटर में पार्किंग के लिए 5 लाख 97 हजार 122 रुपये, पौधा रोपण मेंं 2750 पौधे लगाने के लिए 2 लाख 58 हजार 464 रुपये और कंसल्टेंसी फीस की 3 प्रतिशत राशि 35 हजार 68 रुपये कुल मिलाकर 19 लाख 20 हजार 46 रुपये खर्च किये गये थे.
इनका कहना-
कुँवर विजय शाह, वन मंत्री मप्र का कहना है कि "तितली पार्क के लिए स्वीकृत राशि 78.67 लाख है. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा आपत्ति लिये जाने के कारण तितली पार्क का कार्य अपूर्ण है. मवेशियों से प्लांटेशन को बचाने के लिए क्षेत्र का फेंसिंग से घेराव किया गया है. स्थल निरीक्षण में रोपित 2750 पौधों के विरूद्ध 1307 पौधे जीवित पाये गये हैं. पौधरोपण में मौसमी पौधे होने व सिंचाई का प्रावधान नहीं होने से पौधे मर गये."
मवेशियों का चारागाह बन गया पार्क स्थल
उमंग सिंगार, पूर्व वन मंत्री मप्र का कहना है कि "इतनी राशि खर्च करने के बाद उक्त पार्क मवेशियों के लिये चारागाह में तब्दील हो गया है. सारे पौधे नष्ट होकर मैदान में तब्दील हो गये हैं. इसके लिए जिम्मेदार कौन है और क्या जिम्मेदार पर कार्यवाही की जावेगी?"