मप्र में कांग्रेस विधायकों के भाजपा में शामिल होने के कयासों के बीच बुधवार को राज्य सरकार के प्रवक्ता व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि भाजपा परिवार में कोई आता है तो ठीक है, पर संभावनाओं पर बोलना अभी ठीक नहीं है। देश के कुछ राज्यों में ऑपरेशन लोटस की खबरों के बीच मप्र में भी कुछ कांग्रेस विधायकों को भाजपा के संपर्क में रहने की खबरें तैर रही हैं।
हालांकि सूत्रों की मानें तो कांग्रेस नेतृत्व इसे लेकर चौकस है और अपने विधायकों से संपर्क में है। ज्ञात हो कि तीन साल पहले हुई बड़ी टूट के बाद से भाजपा के 'हौसले' काफी बुलंद हैं। वहीं मिश्रा ने कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा को लेकर कहा कि पता नहीं भारत जोड़ो यात्रा चल रही है या तोडो यात्रा चल रही है। क्योंकि कांग्रेस में भगदड़ मची हुई है। गुलाम नबी आजाद के साथ जम्मू कश्मीर के पूर्व डिप्टी सीएम भी कांग्रेस का साथ छोड़ चुके हैं।
भाजपा जिला अध्यक्षों की रिपोर्ट खराब
इधर सत्तारूढ भाजपा भी अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के चलते कुछ कठोर फैसले लेने की तैयारी में है। सबसे पहले संगठन को कसा जा रहा है। जिलाध्यक्षों की परफॉर्मेंस रिपोर्ट बनाई जा रही है। इसके आधार पर करीब डेढ़ दर्जन जिलों में बदलाव की तैयारी है। सूत्र बताते हैं कि जिन जिलों से जिला अध्यक्षों की ज्यादा शिकायतें मिली हैं उनको जल्दी बदला जा सकता है। वहीं हाल के निकाय चुनाव में जहां पार्टी के प्रत्याशियों की घर हुई या क्रॉस वोटिंग हुई, वहां भी अध्यक्षों को बदला जा सकता है।
संगठन के कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों के जरिए जिला अध्यक्षों की जानकारी मंगाई है। इस आधार पर रिपोर्ट तैयार कराई जा रही है। विधायकों, सांसदों से समन्वय नहीं बना पाने वाले और मनमाने फैसले लेने वाले निशाने पर हैं। तीन बार के अध्यक्ष भी हटेंगे।बताया जाता है कि नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव में कई जिला अध्यक्षों की परफॉर्मेंस रडार पर आ गई है। इसमें मालवा निमाड़ और विंध्य क्षेत्र के जिले इसमें आगे हैं।
वहीं नर्मदापुरम, रीवा, सीधी, सिंगरौली, शहडोल, डिंडोरी, मंडला, अनूपपुर, कटनी, दमोह, अशोकनगर, बड़वानी, बालाघाट, राजगढ़ समेत करीब डेढ़ दर्जन जिलों के जिलाध्यक्षों की कार्यशैली से भाजपा को मन मुताबिक नतीजे नहीं मिले हैं। कई जिला अध्यक्षों पर तो पार्टी के कैंडिडेट का ही विरोध करने व अपने करीबियों को चुनाव लड़ा देने के भी आरोप लगे हैं।