भोपाल।मप्र सरकार केंद्र सरकार द्वारा जारी नये वन संरक्षण नियम 2022 के उस प्रावधान से असहमत है जिसमें अन्य राज्यों की परियोजनाओं के लिये मप्र के अंदर क्षतिपूरक भूमि न देने का उल्लेख है।
दरअसल देश के गोवा राज्य ने अपनी 300 हैक्टेयर तथा अण्डमान निकोबार ने अपनी 4 हजार हैक्टेयर वन भूमि को विकासत्मक परियोजनाओं के लिये डिनोटिफाई करने की मंशा जाहिर की है। चूंकि केंद्र के कैम्पा नियमों के तहत उसके पास इतनी ही अन्य राजस्व भूमि क्षतिपूर्ति करने के लिये नहीं है, इसलिये उसने मप्र से यह भूमि मांगी थी और इसके लिये उसने पन्द्रह सौ करोड़ रुपये देने की भी बात कही थी। मप्र सरकार अपने राज्य में ऐसी राजस्व भूमि देने के लिये तैयार हो गया था तथा इसमें कैम्पा फण्ड के तहत वृक्षारोपण किया जाता और यह वन क्षेत्र बन जाता।
इससे मप्र का वन क्षेत्र बढ़ता एवं विश्व समुदाय की शर्तों के अनुसार नये वन आवरण पर कार्बन क्रेडिट भी मिलती। परन्तु केंद्र द्वारा जारी नये वन संरक्षण नियम में प्रावधान कर दिया गया है कि जिस राज्य में वन भूमि बीस प्रतिशत से कम है वहां ही ऐसी क्षतिपूरक भूमि ली जा सकेगी। जबकि मप्र में वन भूमि करीब 30 प्रतिशत है। ऐसे में उक्त दोनों राज्यों के प्रस्ताव मंजूर नहीं हो पायेंगे तथा आगे भी किसी अन्य राज्य के लिये यह व्यवस्ािा नहीं की जा सकेगी। इसीलिये अब मप्र के सीएम शिवराज सिंह विरोध स्वरुप केंद्र को पत्र भेजेंगे तथा इस प्रावधान को हटाने या शिथिल करने की मांग करेंगे जिससे उक्त दोनों राज्यों के प्रस्ताव मंजूर हो सकें। इस पत्र का प्रारुप वन विभाग ने तैयार कर लिया है तथा अब यह सीएम के जरिये केंद्र को भेजा जायेगा।
यह भी हो गया बदलाव :
पहले प्रावधान था कि वन भूमि लेने के एवज में क्षतिपूरक राजस्व भूमि लेने के लिये वन मुख्यालय के कैम्पा विंग के पीसीसीएफ अकेले जांच कर प्रतिवेदन देते थे परन्तु अब नये वन संरक्षण नियम में प्रावधान कर दिया गया है कि ऐसी जांच के लिये एक कमेटी होगी जिसमें पीसीएफ कैम्पा भोपाल नोडल अधिकारी एवं कमेटी के अध्यक्ष होंगे जबकि सदस्यों में संबंधित सीसीएफ या सीएफ, संबंधित डीएफओ, संबंधित जिला कलेक्टर शामिल रहेंगे तथा नोडल अधिकारी के कार्यालय का एक वन अधिकारी सदस्य सचिव रहेगा। इसका आदेश भी अभी वन मुख्यालय को निकालना है।