MP Forest: वन मंत्री नागर सिंह चौहान ने वित्तीय सेवा के अधिकारी रंजीत सिंह चौहान को ओएसडी बनाने संबंधित प्रस्ताव को लेकर आईएफएस अफसरों में हड़कंप है। सूत्रों ने बताया कि ओएसडी के प्रस्ताव पर अभी न तो संघ की सहमति है और ना ही मुख्यमंत्री की मुहर लगी है।
वित्तीय सेवा के अधिकारी रणजीत सिंह चौहान पूर्व में भी वन विभाग मुख्यालय में अधिकारी के रूप में कार्यरत रहे हैं। इसके अलावा तत्कालीन अपर मुख्य सचिव वन केके सिंह के सलाहकार के रूप में मंत्रालय में काम कर चुके हैं। कुछ ही महीने पूर्व वन मंत्री उमंग सिंघार के यहां भी बिना औपचारिक आदेश के कार्यरत थे।
सिंघार के यहां आते ही उन्होंने वन बल प्रमुख के वाहन की डिमांड कर दी। जब फॉरेस्ट अधिकारियों ने उन्हें नियमों का हवाला देते हुए उनकी मनपसंद वाहन के लिए अपात्र बताया तब वे वन मंत्री के कान भरने लगे थे। इसी दौरान सीनियर आईएफएस अधिकारियों की मौखिक और लिखित शिकायत मंत्री तक पहुंचने लगी और अंतत: वे वहां से रुखसत कर दिए गए।
अब नए वन मंत्री चौहान ने जैसे ही वित्तीय सेवा के अधिकारी चौहान को ओएसडी बनाने का प्रस्ताव भेजा है। खबर लिखे जाने तक उनके आदेश नहीं हो पाए हैं। इस बीच वन मंत्री के यहां अघोषित तौर पर काम करने लगे हैं। यही नहीं फील्ड की अफसर पर दबाव भी बनाने लगे हैं। चौहान की पुरानी कार्य शैली के चलते सीनियर आईएफएस अधिकारियों में हड़कंप है।