चुनाव के पहले तक पुरानी पेंशन राज्य सरकार के लिए जी का जंजाल बनी हुई थी अब यह केंद्र सरकार के लिए चुनौती बनने लगी है। इसके लिए केंद्रीय कर्मचारियों ने मोर्चा खोल दिया है। देशभर के रेलकर्मी पुरानी पेंशन के लिए आंदोलन करने के लिए तैयार है। इस बात का खुलासा रेलवे की मान्यता प्राप्त यूनियनों द्वारा कराए गए मतदान में हुआ है। इसमें भोपाल, जबलपुर मंडल में कार्यरत रेलकर्मियों ने भी हिस्सा लिया था यह मतदान 21 व 22 नवंबर को कराया गया है।

उल्लेखनीय है कि रेलवे हो या अन्य केंद्रीय कर्मचारी संगठन उन्हें आंदोलन पर जाने से पहले गाइडलाइन के अनुसार यूनियन स्तर पर निष्पक्षता के साथ चुनाव कराने पड़ते है। जिसमें कर्मचारी मतदान के जरिए बताते हैं कि वे संबंधित विषय को लेकर आंदोलन पर जाना चाहते हैं या नहीं। इसी के आधार पर सरकार को यूनियनें पत्राचार करके बताती है कि जो मुट्टा उन्होंने उठाया है उसके साथ आम कर्मचारी भी है और यदि बात नहीं मानी तो आंदोलन ही एक मात्र जरिया है जिसके लिए कर्मचारी तैयार है। 

इस आधार पर सरकार या विभाग कर्मचारियों की मांगों को गंभीरता से लेती है या बीच का रास्ता निकाला जाता है या फिर मांगों को मानने से साफ मना कर सकता है ऐसी स्थिति में कर्मचारी आंदोलन करते भी हैं तो सरकार या संबंधित विभाग उस आंदोलन से चरमाने वाली व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए पहल से इंतजाम करती है।

28 कर्मचारी संगठनों ने एक मोर्चा बनाकर लड़ाई शुरू की

भोपाल रेल मंडल में मान्यता प्राप्त यूनियन सेंट्रल रेलवे एम्प्लाइज यूनियन के मंडल अध्यक्ष टीके गौतम का कहना है कि पुरानी पेंशन ही भविष्य का सहारा है, जिसे कि बंद करके नई पेंशन योजना में कर्मचारियों को डाला गया है। इसमें नाममात्र का लाभ मिल रहा है, जिसकी वजह से कर्मचारी परेशान है इसलिए केंद्रीय स्तर पर 28 कर्मचारी संगठनों ने एक मोर्चा बनाकर लड़ाई शुरू की है।