भोपाल: ऐन विधानसभा आम चुनावों के समय राज्य के वनमंडलों में फर्जी मजदूरों को भुगतान पर रोक लगाई गई है। इस संबंध में राज्य शासन ने वन बल प्रमुख को निर्देश में कहा है कि सीधी सामान्य वनमण्डल में एक ऐसा प्रकरण प्रकाश में आया है जिसमें वन परिक्षेत्र से प्राप्त प्रमाणक में संलग्न मजदूरों की मास्टर सूची एवं राशि को कम्प्यूटर में दर्ज करते समय मास्टर सूची में से कुछ मजदूरों के नाम एवं राशि घटाकर अन्य व्यक्तियों के नाम एवं राशि जोड़े गये। इस प्रकार अतिरिक्त नाम जोडक़र तैयार की गई सूची का मिलान करने की कोई प्रक्रिया वनमण्डल स्तर पर निर्धारित नहीं थी। कोषालय को भेजने के पूर्व मजदूरों / वेंडर्स की अंतिम सूची के सत्यापन की तत्समय कोई व्यवस्था नहीं थी। इसलिये अब प्रमाणक एवं मजदूरों / वेंडर्स की सूची, जो कम्प्यूटर में फीड की जाती है तथा कोषालय को भेजी जाती है, उसके प्रारूप का प्रिंटआउट निकालकर वनमण्डल अधिकारी/डीडीओ स्वयं सत्यापन करें तथा वन परिक्षेत्र से प्राप्त मास्टर सूची से मिलान कर सत्यापन अनुसार ही भुगतान हेतु कोषालय को भेजी जाये। बिना वनमण्डल अधिकारी / डीडीओ के सत्यापन के कोषालय में प्रेषित सूची के संबंध में यदि कोई अनियमितता पायी जाती है तो उसके लिये वनमंडल अधिकारी / डीडीओ स्वयं उत्तरदायी होंगे।

ठेके से काम करने का प्रावधान किया :

इधर राज्य शासन ने वन बल प्रमुख को एक अन्य निर्णय की जानकारी भेज कर कहा है कि वन विभाग के अंतर्गत विभागीय निर्माण एवं मरम्मत कार्य निविदा प्रक्रिया के तहत किये जाने के निर्देश पूर्व में जारी किये गये हैं। लेकिन अब निर्माण कार्यों के अलावा वृक्षारोपण में वानिकी कार्य जैसे पौधा तैयारी, गढ्ढा खुदाई, वृक्षारोपण, गैर वन क्षेत्रों में पर्यावरण वानिकी कार्यों, कैम्पा कार्य, वृक्षारोपण एवं वन्यजीव क्षेत्रों में चैंनलिंक फैंसिंग कार्य को भी निविदा के माध्यम से कराना होगा। इसके लिये निविदा के माध्यम से कराये जाने वाले कार्यों के भुगतान के संबंध में बजट मद का निर्माण कर पुनर्विनियोजन का प्रस्ताव तत्काल प्रेषित किये जायें। इस नई प्रक्रिया से अब वनमंडलों के प्रमुखों को सिर्फ ठेकेदारों को ही भुगतान करना होगा तथा उन्हें मजदूरों को भुगतान से संबंधित सैकड़ों वाउचर्स पास नहीं करने होंगे।