मप्र समेत राजस्थान व छत्तीसगढ़ में सांसदों को चुनाव लड़ाने के प्रयोग को कांग्रेस लोकसभा चुनाव में आजमा सकती है, हालांकि उसका 'मॉडल' थोड़ा अलग होगा, लेकिन लब्बोलुबाब यही होगा कि क्षत्रप अपना वजूद व वर्चस्व साबित करें। हिंदी पट्टी के इन तीनों राज्य में भाजपा ने अपने सांसदों व अन्य प्रभावी नेताओं को मैदान में उतारकर कांग्रेस की अंचलवार घेराबंदी कर दी थी, जिसे कांग्रेस अंत तक समझ नहीं सकी। 

जानकार सूत्र बताते हैं कि हाल में विधानसभा चुनाव हारने और जीतने वाले नेताओं समेत राज्यसभा सदस्य व कांग्रेस से जुड़े कुछ बड़े चेहरों व राष्ट्रीय पदाधिकारियों को भी मैदान में उतारने की योजना पर काम हो रहा है। खास बात यह है कि इस प्रयोग में जान फूंकने के लिये खुद पार्टी चीफ मल्लिकार्जुन खरगे भी कर्नाटक से मैदान में उतर सकते हैं। इस प्रयोग की जद में मप्र भी निश्चित तौर पर होगा, एक सूत्र की मानें तो मप्र में करारी हार के बाद यहां की स्थितियों पर पार्टी हाइकमान की खास नजर है और प्रभारी महासचिव, सचिव व अन्य माध्यमों से यहां की मौजूदा स्थितियों व भावी संभावनाओं पर जानकारी जुटाई जा रही है। इसके तहत कमलनाथ को भी चुनाव मैदान में उतारा जा सकता है, वहीं अनुभवी व सक्षम नेता अजय सिंह, गोविंद सिंह, रामनिवास रावत, जीतू पटवारी, सज्जन वर्मा, कमलेश्वर पटेल, कांतिलाल भूरिया आदि को भी चुनाव लड़ने को कहा जाएगा।

पिछला चुनाव हारे कई नेता भी फिर मोर्चे पर होंगे, दिग्विजय सिंह को फिर आजमाया जा सकता है। सूत्र बताते हैं कि मप्र में कांग्रेस अपने अंचलों में प्रभावी नेताओं को टिकट देकर माहौल तैयार करना चाहती है। पिछले चुनाव में एक ही सीट उसे मिली थी।

दरअसल आगामी 19 दिसंबर को कांग्रेस व विपक्षी दलों के इंडिया गठबंधन की बैठक होने वाली है। इसमें सीट शेयरिंग के मामले में भी चर्चा होना है। वह चुनाव में ज्यादा सीटों पर लड़ने का दावा करना चाहती है, क्योंकि हिंदी पट्टी के तीनों राज्यों में हालिया हार के बाद कई सहयोगी दल उसे कम 'तौल' सकते हैं, इसलिये कांग्रेस मप्र समेत सभी राज्यों में कम से कम दो सौ सीटों पर बेहद मजबूत उम्मीदवार उतारने का खाका बना रही है।

विधायकों से रायशुमारी के पहले नाथ ने भोपाल छोड़ा
14 दिसंबर को कांग्रेस के विधायकों का मन टटोलने आ रहे 'पर्यवेक्षक' रणदीप सिंह सुजरेवाला व जितेंद्र सिंह संगठन की नई रचना के लिये सुझाव लेने का प्रयास करेंगे, बताया जाता है कि मुख्य तौर पर नेता प्रतिपक्ष के लिये रायशुमारी कराई जाएगी और आने वाले समय में संगठन के कामकाज पर भी सुझाव लिये जाएंगे। नेता प्रतिपक्ष की रेस में रामनिवास रावत, अजय सिंह के नाम ऊपर हैं। वहीं कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ रायशुमारी के दौरान भोपाल में नहीं रहेंगे, वे कल ही भोपाल से छिंदवाड़ा रवाना हो गए, वे दो तीन दिन वहां रुकने के बाद दिल्ली चले जाएंगे व संभवत 25 दिसंबर के बाद लौटेंगे। सूत्रों का कहना है कि खरगे और राहुल गांधी के निर्देश पर यह कवायद हो रही है। राहुल ने अपनी विदेश यात्रा टालकर बीते पांच दिनों से पार्टी की मौजूदा स्थिति पर विचार मंथन का सिलसिला चला रखा है। मप्र में हार को लेकर हाइकमान बेहद नाराज बताया जा रहा है।