मप्र की मोहन यादव सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार को कल दिल्ली में मंजूरी मिलने के आसार हैं। मुख्यमंत्री कल दिल्ली में पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा से मिलेंगे और इस दौरान प्रदेशाध्यक्ष वीडी शर्मा और महामंत्री हितानंद भी मौजूद रहेंगे। यह बतौर मुख्यमंत्री डा यादव की पहली दिल्ली यात्रा होगी। जानकार सूत्रों का कहना है कि अब कैबिनेट में तात्कालिक विस्तार न होकर पूर्ण आकार देने की कोशिश होगी। इसके तहत लगभग बीस मंत्रियों को काबीना में शामिल करने पर फैसला होगा।

हाइकमान इसे लेकर अपना फार्मूला रखेगा तथा इसके हिसाब से नाम भी तय करेगा। इसमें पुराने चेहरों को फिर कैबिनेट में लाने की संभावना कम बताई जा रही है। इनके बजाए एक से अधिक चुनाव जीत चुके विधायको को तरजीह मिलने के आसार लग रहे हैं। पहले संभावना थी कि करीब दस मंत्रियों को आज मलमास शुरू होने के पहले शाम तक शपथ दिलाई जाएगी, मगर अब यह संभावना खत्म होगई है।

राज्यपाल भी 19 दिसंबर तक भोपाल से बाहर हैं। बताया जाता है। कि राज्य सरकार अगले कुछ ही दिनों में जिले व संभागों में तैनात अफसरों की पदस्थापना में भी फेरबदल को खाका बना रही है। मुख्यमंत्री अपने फीडबैक व हालिया बैठकों के बाद अफसरों को तैनात करने वाले हैं। एक अन्य वजह 20 दिसंबर से चुनाव आयोग द्वारा लोकसभा चुनाव के मद्देनजर शुरू की जा रही मतदाता सूची आदि की प्रक्रिया भी है। इसके चलते अफसरों के तबादले नहीं हो पाते हैं।

माना जा रहा है कि कल मंत्रिमंडल पर फैसला हो जाने के बाद वरिष्ठ नेताओं की भूमिका के बारे में भी हाइकमान फैसले लेगा। इसमें शिवराज सिंह चौहान प्रमुख हैं। शिवराज चुनाव के नतीजे आने के बाद से दिल्ली नहीं गये हैं। वे मप्र में ही रहने की बात भी कर चुके हैं। लेकिन सूत्र बताते हैं कि उन्हें केंद्रीय कैबिनेट में भी एडजस्ट किया जा सकता है क्योंकि वहां कई पद रिक्त हैं। वहीं मप्र के पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव, कैलाश विजयवर्गीय, प्रहलाद पटेल आदि के बारे में भी हाइकमान को फैसला करना है। यह सभी विधानसभा चुनाव जीते हैं। लेकिन अब कैबिनेट में इनके शामिल | होने की संभावना बेहद कम नजर आ रही है। जबकि विधानसभा का चुनाव हार चुके नरोत्तम मिश्रा के बारे में भी पार्टी कोई निर्णय ले सकती है, उन्हें भी किसी भूमिका में लाया जा सकता है।