मध्यप्रदेश में नई कैबिनेट का गठन हो चुका है। सोमवार को राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने 28 विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाई। इनमें से 18 कैबिनेट मंत्री और 10 राज्य मंत्री हैं। खास बात ये है कि 28 मंत्रियों में 18 नए चेहरे हैं। इनमें से 7 पहली बार के विधायक हैं।

बड़ी बात यह है कि इन 28 मंत्रियों में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के तीन समर्थकों को ही जगह मिली है। जबकि मार्च 2020 में भाजपा की शिवराज सरकार में 33 मंत्रियों में सिंधिया खेमे के 11 मंत्री थे। कांग्रेस ने इसे लेकर सिंधिया पर निशाना साधा है।

प्रदेश कांग्रेस के आधिकारिक X हेंडल से मंत्रिमंडल में सिंधिया समर्थकों की कम हुई संख्या को लेकर न सिर्फ एक न्यूज़ शेयर की गई बल्कि यह तक लिखा गया कि अब ग़द्दारी का इनाम घटने लगा है।

मोहन यादव के मंत्रिमंडल में सिंधिया समर्थक तीन मंत्री तुलसी सिलावट, गोविंद सिंह राजपूत और प्रदुम्न सिंह तोमर ही हैं। माना जा रहा है कि शिवराज मंत्रिमंडल में सिंधिया समर्थकों को जगह देना सरकार की मजबूरी थी। इसका मतलब यह लगाया जा रहा है कि कांग्रेस से बगावत के बाद बीजेपी में शामिल हुए सिंधिया समर्थक अब बीजेपी के कार्यकर्ता मात्र हैं। भविष्य में उनके संबंध में जो भी फैसले लिए जाएंगे वे बीजेपी की रीति-नीति के अनुरूप ही होंगे।  

शिवराज सरकार के दौर में ऐसा वातावरण बना था कि सिंधिया समर्थकों के कारण ही सरकार बनी है। इसलिए उनके संबंध में निर्णय लेते समय पार्टी एक विशेष नजरिया अपनाती थी, जो अब समाप्त होता दिख रहा है।