भोपाल: राज्य के जल संसाधन विभाग के जबलपुर स्थित हिरन जल संसाधन संभाग में निर्माण कार्य अत्यंत धीमी गति के पाये गये हैं। यह तथ्य प्रमुख अभियंता शिशिर कुशवाहा की अध्यक्षता में अफसरों एवं ठेकेदारों के साथ हुई उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में आया है। हिरन मिट्टी बांध कार्य का काम मेसर्स एसआरएस इन्फ्रावे प्रालि ग्वालियर कर रही है। कंपनी ने एम-30 कांक्रीट की लगभग 3250 घनमीटर मात्रा के एवज में 1203.81 घनमीटर मात्रा ही संपादित की है, जिसके लिये कंपनी को कहा गया है कि वह अप्रैल 2024 के पूर्व यह कार्य पूर्ण कर ले। कंपनी से यह भी कहा गया है कि वह बांध के अपस्ट्रीम व डाउनस्ट्रीम में पिचिंग कार्य को जनवरी 2024 के पूर्व करे।
इसी प्रकार, बदुआ से करनापुर मार्ग निर्माण का कार्य मेसर्स आरके कंस्ट्रक्शन जबलपुर को सौंपा गया है जिसे कहा गया है कि हिरन बांध के डूब क्षेत्र से आंशिक प्रभावित कुण्डम-बघराजी मार्ग को पुन: जोडऩे हेतु निर्माणाधीन नवीन बदुआ-करनापुरा-कुण्डम मार्ग के निर्माण कार्य को अतिशीघ्र पूर्ण करने हेतु शेष डामरीकरण कार्य सहित स्लोप प्रोटेक्शन कार्य, सीसी ड्रेन, रोड फर्नीचर कार्य जैसे साईन बोर्ड, इन्फारमेटरी बोर्ड आदि, मेटल बीम क्रेश बैरियर इत्यादि कार्य जनवरी 2024 तक पूर्ण करे। छीताखुदरी काम्प्लेक्स नहर निर्माण कार्य मेसर्स जे डब्ल्युएल नई दिल्ली को सौंपा गया है जिससे कहा गया है कि उसके द्वारा पाईप लेईंग कार्य की प्रगति अत्यंत धीमी है, इसलिये कंपनी इसे जनवरी 2024 तक पूर्ण करे।
इसी प्रकार, छीताखुदरी पुनर्वास कालोनी निर्माण कार्य मेसर्स भगवत प्रसाद शर्मा ग्वालियर को सौंपा गया है। इस ठेकेदार से कहा गया है कि कालोनी निर्माण कार्य अंतर्गत प्राथमिक शाला भवन, ग्राम पंचायत भवन, सामुदायिक भवन, आंगनवाड़ी भवन, रंगमंच, दुकानें, हाट बाजार, सीसी रोड, सीसी ड्रेन, बस स्टाप प्रवेश द्वार, शमशान घाट, निस्तारी तालाब, विश्राम गृह आदि को शत प्रतिशत पूर्ण कर जनवरी 2024 तक ट्रांसफर करे।
उल्लेखनीय है कि जबलपुर में छीताखुदरी प्रेशराईज्ड पाईप मध्यम परियोजना की लागत 434 करोड़ 21 लाख रुपये है जिससे 16 हजार 875 हैक्टेयर में सिंचाई होना है। बघराजी नहर प्रणाली की लागत 33 करोड़ 42 लाख रुपये है जिससे 2 हजार 800 हैक्टेयर में सिंचाई होना है। हिरन प्रेशराईज्ड पाईप सिंचाई परियोजना की लागत 225 करोड़ 99 लाख रुपये है जिससे 6 हजार 723 हैक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई होना है। इन तीनों परियोजनाओं के पूर्ण होने का लक्ष्य जून 2024 रखा गया है।