पुरानी पेंशन ही नहीं, अब ईपीएफ में बढ़ोतरी की मांग भी तेज हो गई है। इसको लेकर निजी व केंद्र सरकार से सबद्ध सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों ने सरकार की घेराबंदी तेज कर दी है। मप्र समेत 20 राज्यों कर्मचारी 12 दिसंबर को दिल्ली के जंतर-मंतर मैदान में हुंकार भरेंगे। असल में लोकसभा चुनाव के पहले इन क्षेत्रों के कर्मचारी सरकार पर दबाव बना रहे हैं कि ईपीएफ पेंशन की राशि बढ़नी चाहिए, जो कि अभी 1000 से 2500 रुपये है। इस राशि से कर्मचारी कल्याण बिल्कुल नहीं हो रहा है।
सुप्रीम कोर्ट भी पूर्व में कह चुका है कि इन कर्मचारियों को सेवानिवृत्त होने पर वास्तविक वेतन की गणना के अनुरूप ईपीएफ पेंशन दी जाए लेकिन इसका पालन नहीं हो रहा है। मामूली पेंशन से कर्मचारी नाराज है और इसको लेकर दिल्ली में जुटकर रणनीति तैयार करेंगे। निवृत्त कर्मचारी (1995) राष्ट्रीय समन्वय समिति के महासचिव चंद्रशेखर परसाई ने बताया कि ईपीएफ के पेंशनभोगियों एवं वर्तमान में कार्यरत कर्मचारियों की मांगों को लेकर पिछले 10 साल से जंतर मंतर एवं रामलीला मैदान पर प्रदर्शन कर सरकार का ध्यान अपनी मांगों पर करवा रही है।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2013 से भगत सिंह कोशियारी कमेटी की रिपोर्ट संसद में लंबित है, तत्कालीन सांसद प्रकाश जावड़ेकर कहने पर राज्यसभा ने इसका गठन किया था, जिसमें 10 सांसद सम्मिलित थे। कोशियारी कमेटी ने प्रत्येक ईपीएफ के पेंशनभोगियों को 3000 रुपये प्रतिमाह मंहगाई भत्ता एवं उस पर प्रचलित दर से मंहगाई भत्ता देने की अनुशंसा की थी। समिति ने इन पेंशनभोगियों को मेडिकल सुविधा की सिफारिश भी की थी। सरकार से अंशदान बढ़ाने की अनुशंसा भी की थी। सरकार 1971 से अपना अंशदान 1.16 फीसदी दे रही है। सदस्यों से पेंशन फण्डमें 8.33 फीसदी मासिक के स्थान पर 8.96 कटौती की अनुशंसा भी हुई थी।
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन केंद्र सरकार ने किसी भी अनुशंसा पर अमल नहीं किया। परसाई के मुताबिक पेंशनभोगी को 9000 रुपये प्रति माह मंहगाई भत्ता के साथ भुगतान किया जाए। सभी राज्यों में इस श्रेणी के 75 लाख 59 हजार पेंशनभोगी हैं। समिति के मध्यप्रदेश पदाधिकारियों अनिल वाजपेई, पीके परिहार, जेपी गौड़, महेश मालवीय, डॉ. एके निगम, प्रमोद हजारे, अजय श्रीवास्तव, हेमंत कपूर, अशोक सिंह सज्जन, महेश चन्द्र उपाध्याय, सीएस शर्मा, उषा मालवीय, गीता तिवारी, संजना रिछारिया ने जंतर मंतर के आन्दोलन में भाग लेने की अपील की है।