भोपाल में यूनियन कार्बाइड गैस हादसे की 39वीं बरसी के मौके पर एक बार फिर उनको याद करने की औपाचारिकता निभाने का शहर में मौका आ गया है।हैरत की बात तो यह है कि गैस कांड में मारे गये और प्रभावित लोगो की तीसरी पीढ़ी भी कार्बाइड के दंश से नहीं बच सकी है। हाल ही में इस संबंध में काम करने वाले संभावना ट्रस्ट ने रिसर्च करने के बाद जो रिपोर्ट पेश की है उसमें बताया कि 1 जनवरी 2022 से अब तक 22 पीड़ितों की मौत हुई है। इनमें से 14 यानी 64 परसेंट की मौत हाई ब्लड प्रेशर ( उच्च रक्तचाप) और बाकी की मौतें डायबिटिज (मधुमेह) की वजह से हुई है। मतलब यह सिलसिला बराबर चल रहा है।
गैस पीड़ित संगठनों ने डाउ केमिकल कंपनी का किया पुतला दहन
गैस त्रासदी की 39वीं बरसी पर शनिवार को कई संगठनों द्वारा गैस पीड़ितों को न्याय दिलाने सहित कई मांगों को लेकर आज श्रद्धांजलि सभा और प्रदर्शन किया गया। गैस पीडित निराश्रित पेंशन भोगी संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष बालकृष्ण नामदेव के नेतृत्व में निलम पार्क में पुतला दहन किया गया।
39 साल : आज भी पीड़ितों के हरे हैं जख्म
भोपाल गैस कांड के 39 साल बीतने को हैं । इस त्रासदी के पीड़ितों के जख्म आज भी हरे हैं। यह हादसा पत्थर दिल इंसान को भी इस कदर विचलित कर देने वाला था कि हादसे में मारे गए लोगों को सामूहिक रूप से दफनाया गया और उनका अंतिम संस्कार किया गया था जबकि करीब दो हजार जानवरों के शवों को विसर्जित करना पड़ा और आसपास के सभी पेड़ बंजर हो गए थे।
गैस पीड़ितों में कौन-कौन सी बीमारियां बढ़ी
पिछले दो साल में इलाज लेने वाले 6254 व्यक्तियों में से मधुमेह, कोरोनरी धमनी रोग, न्यूरोपैथी और गठिया की बीमारी गैर गैस पीड़ितों की अपेक्ष पीड़ितों में तीन गुना ज्यादा है। गैर गैस पीड़ितों की अपेक्षा गैस पीड़ितों में उच्च रक्तचाप, एसिड पेप्टिक रोग, अस्थमा, सीओपीडी, सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस और चिंता की बीमारियां दोगुनी है। हैरत की बात तो यह है कि इनके इलाज की पर्याप्त व्यवस्था न होने के कारण उनमें अब हीन भावना आ गयी है।