EVM में गड़बड़ी के खिलाफ अभियान चला रहे पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के समर्थन में अब कांग्रेस के दिग्गज नेता कमल नाथ भी उतर आए हैं। कमल नाथ ने कहा, 'भारतीय लोकतंत्र को मजबूत करने और भारत के नागरिकों के लिए 100% मतदान सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मतदान प्रणाली को बदलना होगा। अब EVM को हटाकर बैलेट पेपर से चुनाव कराया जाना चाहिए।
पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ खुलकर दिग्विजय सिंह के समर्थन में आ गए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा, भारतीय चुनाव प्रक्रिया में ईवीएम मशीन की विश्वसनीयता को लेकर लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं। राज्यसभा सांसद श्री दिग्विजय सिंह ने तकनीकी विशेषज्ञों के साथ आज भोपाल में डमी ईवीएम मशीन में छेड़छाड़ का प्रदर्शन एक पत्रकार वार्ता के जरिए प्रस्तुत किया। वहां मौजूद पत्रकारों ने स्वयं डमी ईवीएम का बटन दबाया और यह पाया कि न सिर्फ वोट संख्या में बल्कि वीवीपेट से प्राप्त होने वाली पर्ची में भी बदलाव किया जा सकता है। इसका सीधा अर्थ है कि जो वोट भारत का नागरिक डाल रहा है उसमें छेड़छाड़ की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
इसलिए यह आवश्यक हो गया है कि भारतीय लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए और भारत के नागरिकों का मतदान 100% सुरक्षित करने के लिए वोटिंग की प्रणाली में बदलाव किया जाए। ईवीएम हटाकर मत पत्र से चुनाव कराए जाएं। और अगर ईवीएम से ही चुनाव कराने हैं तो वोट की पर्ची मतदाता को हाथ में मिलनी चाहिए जिसे वह मत पेटी में डालें और इसी पर्ची को गिना जाए।
दरअसल, पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने बुधवार (24 जनवरी) को भोपाल स्थित अपने आवास पर मीडिया की मौजूदगी में एक्सपर्ट की मदद से EVM में गड़बड़ी का डेमो दिया। इसके बाद उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा, '140 करोड़ की आबादी वाले देश में जहां 90 करोड़ वोटर हों, क्या ऐसे लोगों को ये सब तय करने का अधिकार देना चाहिए?
उन्होंने कहा कि चुनाव प्रक्रिया पर न तो मतदाताओं का अधिकार है और न ही अधिकारियों व कर्मचारियों का। इसका मालिक वही होता है जो सॉफ्टवेयर बनाता है और अपलोड करता है। पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने आगे कहा कि चुनाव आयोग सवालों का जवाब नहीं दे रहा है. हमें बताया जाता है कि वीवीपैट सात सेकंड तक दिखाई देता है, लेकिन जो दिखाई देता है वह प्रिंट हो जाता है, इसकी क्या गारंटी है?