विधानसभा चुनाव का काउंट डाउन शुरु होने के साथ ही एक बार फिर दल-बदल और विधायकों की नाराज़गी का सिलसिला भी शुरु होता दिख रहा है। ताजा मामले में मैहर विधायक नारायण त्रिपाठी ने भारतीय जनता पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से एवं विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना त्यागपत्र भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा और विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम को को भेजा दिया है। इसके बाद से नारायण त्रिपाठी के कांग्रेस में शामिल होने की अटकलें तेज हो गई हैं।
सूत्रों के अनुसार नारायण त्रिपाठी पिछले दिनों प्रियंका गांधी से दिल्ली में मुलाकात कर चुके हैं। नारायण त्रिपाठी के इस्तीफे के बाद ये कहा जा रहा है, कि वे अब किसी भी वक्त कांग्रेस की सदस्य ले सकते हैं। संभावना जताई जा रही है, कि वे 14 अक्टूबर को कांग्रेस की सदस्यता ले सकते हैं। वहीं उनकी पुनः कांग्रेस वापसी में कांग्रेस नेता राजीव शुक्ला का बड़ा हाथ बताया जा रहा है।

मैहर से चौथी बार के विधायक नारायण त्रिपाठी जिन्होंने पिछले दो चुनाव 2016 उपचुनाव और 2018 चुनाव बीजेपी उम्मीदवार के रूप में जीते हैं, 17 नवंबर को होने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट से लड़ सकते हैं। अलग विंध्य प्रदेश के लिए मोर्चा खोले बैठे त्रिपाठी ने 2013 का विधानसभा चुनाव मैहर सीट से कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में जीता था।

विधायक नारायण त्रिपाठी पृथक विंध्य राज्य के गठन की मांग को लेकर लम्बे समय से आंदोलन कर रहे हैं और बीते दिनों अलग पार्टी बनाकर चुनाव लड़ने का ऐलान भी कर चुके हैं। विंध्य विकास पार्टी बनाकर वे विंध्य की 30 सीटों पर चुनाव में अपने प्रत्याशी उतारने की घोषणा भी कर चुके हैं।
भाजपा ने नारायण त्रिपाठी की सीट मैहर पर भाजपा ने श्रीकांत चतुर्वेदी को प्रत्याशी घोषित किया है। श्रीकांत चतुर्वेदी को केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य का समर्थक माना जाता है। श्रीकांत चतुर्वेदी को टिकट दिए जाने के बाद ही नारायण त्रिपाठी द्वारा बड़ा कदम उठाने की बात कही जा रही थी।
बीते दो सालों से नारायण त्रिपाठी सत्ता और संगठन के खिलाफ मुखर रहे हैं। हालंकि उनके बगावती तेवरों के बाद भी बीजेपी का रुख त्रिपाठी के लिए बहुत सख्त नज़र नहीं आया है। उन्हें भोपाल बुलाकर समझाइश तो दी गई लेकिन कोई एक्शन नहीं लिया गया है।
नारायण त्रिपाठी अपनी विधानसभा मैहर को जिला बनाने की मांग को लेकर लंबे समय से आंदोलन कर रहे थे। नारायण त्रिपाठी ने विंध्य अंचल में इसे बड़ा मुद्दा बना दिया है। हालाँकि शिवराज सरकार ने मैहर को जिला बनाने के आदेश जारी कर इस मुद्दे की काट जरूर तलाशी है साथ ही विंध्य में विकास कार्यों की सौगातों से इस मुद्दे को कमजोर किया है।