भोपाल। मावठा गिरने से हवा की सेहत में सुधार आया है। भोपाल का एयर क्वालिटी इंडेक्स 300 से घटकर 96 से 250 तक पहुंच गया है। सबसे अधिक फायदा कोलार, अरेरा कॉलोनी, एमपी नगर, भेल, और नर्मदापुरम रोड क्षेत्र के रहवासियों को हुआ है। इन क्षेत्रों में सर्वाधिक प्रदूषण था जिसके कारण इंडेक्स 300 के उपर बना हुआ जो मावठा के कारण गिरकर 96 के आसपास आ गया है।

यही हाल प्रदेश के उन जिलों में है जहां मावठे की बारिश हुई है। आने वाले समय में भी मावठा गिरने की संभावना जताई जा रही है, इस तरह मावठा गिरने तक तो कम से कम हवा की सेहत में सुधार बना रहेगा। हालांकि उसके एक से दो दिन बाद ही शहरों में धूल वाला वातावरण मुसीबत बनेगा।

उल्लेखनीय है कि भोपाल शहर के कोलार, एमपी नगर, टीटी नगर, भेल, गोविंदपुरा, हमीदिया रोड, कलेक्टर कार्यालय, पुराना शहर से लेकर बैरागढ़ क्षेत्र में दीपावली के पहले से ही प्रदूषण जानलेवा बना हुआ है। इसे नियंत्रित करने वाले जिम्मेदार विभाग कागजी घोड़े दौड़ाने में लगे हैं। हाल यह है कि बीते वर्षों की तुलना में प्रदूषण कम होने की बजाए बढ़ गया है।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड मप्र से मिली जानकारी के मुताबिक भोपाल के टीटी नगर, कलेक्टर कार्यालय क्षेत्र में प्रदूषण का स्तर बताने वाला इंडेक्स मंगलवार सुबह 10 बजे के करीब 250 के आसपास था। रहवासी क्षेत्रों प्रदूषण के स्तर को पता लगाने वाला इंडेक्स 96 रहा है, इन क्षेत्रों में मावठा अधिक गिरा है जिसके कारण धूल, धुएं के कणों का फैलाव कम हुआ है। इसके कारण स्थिति सुधरी है।प्रदेश की बात करें तो ग्वालियर में भी प्रदूषण के स्तर में कमी देखी जा रही है यहां भी इंडेक्स 300 के आसपास रहता था जो 150 से 200 के आसपास आ गया है। वहीं सिंगरौली में जो इंडेक्स दो दिन पहले तक 320 के उपर था, वहां भी गिरावट आई है। इसी तरह इंदौर, जबलपुर व उज्जैन में भी राहत है।

प्रदूषण बढ़ने घटने की वजह

जब मौसम शुष्क रहता है जब प्रदूषित कण हल्के होकर वातावरण में उपर की ओर चले जाते हैं जो रिकार्ड में नहीं आते लेकिन जैसे ही मौसम में नमी मिलती है यही कण भारी हो जाते हैं और निचली सतह में बने रहते हैं, जो नुकसान पहुंचाते हैं। बारिश में इनका असर सबसे कम रहता है।