मध्यप्रदेश में मतदान संपन्न हो गया है। रात साढ़े ग्यारह बजे के बाद चुनाव आयोग की तरफ जारी आंकड़ों के मुताबिक, पूरे प्रदेश में 76.55 फीसदी वोटिंग हुई है। सिवनी में सर्वाधिक 85.86 वहीं बालाघाट जिले में 85.23 प्रतिशत मतदान हुआ। सबसे कम 60.1 वोटिंग आलीराजपुर में हुई।
इस बार प्रदेश के विभिन्न अंचलों में हुई वोटिंग कोई एकतरफा संकेत सामने नहीं आ रहा है। हर अंचल में वोटिंग पैटर्न के साथ ही जनता का मूड अलग दिखाई दे रहा है। बड़ी बात यह है कि एक ही अंचल में भी हवा एक जैसी नहीं दिख रही है एक ही अंचल में भी जिलेवार अलग अलग रुझान दिखाई दिया।
ऐसे में इस मतदान के जो बड़े संकेत निकलकर सामने आए हैं उन्हें कुछ इस तरह समझा जा सकता है-
1. प्रदेश के चुनाव में इस बार सबसे ज्यादा चर्चा लाडली बहना योजना की थी। यह योजना मतदान के समय भी प्रभावी दिखी जिसका सीधा फायदा भाजपा को हो सकता है।
2. प्रदेश में 18 साल के कार्यकाल के भाजपा सरकार को लेकर नाराजगी भी वोटिंग में साफ दिखी। मतदाता बदलाव की बात करते देखे गए जिसका फायदा कांग्रेस को हो सकता है.
3. दोनों ही पार्टी प्रत्याशी चयन के मामले में कुछ सीटों पर चूक कर गईं। इसका सीधा असर दोनों ही पार्टी के प्रदर्शन पर दिखाई देगा। यह चूक निर्णायक भी साबित हो सकती है।
4. भाजपा का तीन केंद्रीय मंत्रियों समेत सात सांसदों एक पार्टी महासचिव पर दांव मास्टरस्ट्रोक साबित होता नहीं दिखा। ये बड़े नाम अपनी ही सीटों पर उलझे रह गए। भाजपा के ये सभी आठ दिग्गज जीत दर्ज़ करेंगे ये मुश्किल है, परिणाम आश्चर्यजनक भी हो सकते हैं।
5. पूरे प्रदेश में हवा एक जैसी नहीं रही। न सत्ता के पक्ष में उत्साह दिखा और न ही बदलाव को लेकर पूरे प्रदेश कोई लहर जैसी दिखाई दी। पार्टी से ज्यादा प्रत्याशियों के चेहरों पर मतदाता ने वोट किया है।
6. मोदी मैजिक प्रदेश में पूरी तरह दिखाई नहीं दिया, भाजपा के प्रदेश नेतृत्व को लेकर भी स्थिति मतदाता असमंजस में रहे। कांग्रेस को उसके प्रदेश स्तर के बड़े चेहरों का अपेक्षित फायदा नहीं मिला। कांग्रेस का प्रचार और मैनेजमेंट मारक नहीं दिखा।