मध्यप्रदेश विधानसभा के तीसरे दिन बुधवार को नरेंद्र सिंह तोमर विधानसभा अध्यक्ष चुने गए। तोमर ने एक दिन पहले नामांकन जमा कर दिया था, विपक्ष का भी समर्थन मिलने के बाद उनका निर्विरोध अध्यक्ष चुना जाना तय था।
प्रस्तावक सीएम डॉ. मोहन यादव एवं इस प्रस्ताव के समर्थक नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार बने। प्रस्तावक समर्थकों में सात 7 विधायक हैं। बुधवार को सदन में अध्यक्ष चुने जाने के बाद तोमर ने आसंदी ग्रहण की।
इस मौके पर बोलते हुए नवनिर्वाचित अध्यक्ष तोमर ने कहा, थोड़े दिन अभी लगातार हमारे सदन के वरिष्ठतम सदस्य गोपाल भार्गव जी ने प्रोटेम स्पीकर के रूप में अपने दायित्व को निर्वाह किया हम सब लोगों को शपथ का प्रति ज्ञान कराया और कार्रवाई का सफल संचालन किया निर्वाचन प्रक्रिया का संचालन उनके द्वारा किया गया मैं उनके प्रति भी आभार प्रकट करता हूं और उन्हें बहुत-बहुत धन्यवाद देता हूं।
हमारा यह सदन बहुत गौरवशाली सदन है पंडित कुंजीलाल दुबे जी से लेकर गिरीश गौतम जी तक यह एक लंबी यात्रा है और इस लंबी यात्रा में मेरे से पूर्व अध्यक्षों ने अनेक प्रकार के मानदंड स्थापित किए हैं परंपराएं स्थापित की हैं और अपने-अपने कार्यकाल में अपने-अपने ढंग से इस सदन का गौरव बड़े इस बात का प्रयत्न उनकी ओर से हुआ है अध्यक्ष के रूप में आप सब की निश्चित रूप से मुझे भी इसी प्रकार की अपेक्षा है मेरी ईमानदार कोशिश होगी कि मैं आपकी अपेक्षा के अनुसार अपने दायित्व का निर्वहन कर सकूं।
मेरे निर्वाचन के पश्चात विभिन्न माननीय सदस्यों ने मेरे बारे में अपने विचार व्यक्त किया मुझे नहीं मालूम कि मैं उन विचारों के योग्य हूं अथवा नहीं लेकिन मैं इतना जरुर जानता हूं कि अगर आपके मन में ऐसा भाव मेरे मन में है मेरे प्रति मन में है तो मेरी यह जवाब देही है कि मैं उसका सम्मान करूं और मैं उसे निभाने की पूरी कोशिश करूंगा।
यह भी अपेक्षा की गई है कि मैं प्रतिपक्ष के सदस्यों को अधिक समय दूं सत्ता पक्ष के सदस्यों ने भी अपेक्षा व्यक्त की है लेकिन मैं इतना जरूर आप सबको कहना चाहता हूं इस आसन संधि पर रहते हुए मेरी कोशिश यह रहेगी कि मेरी निगाह और नजर हर सदस्य पर रहे और जो हक उसे मिलना चाह उसे उसे वंचित नहीं रहना चाहिए यह निश्चित रूप से मेरी कोशिश रहेगी।
विधानसभा में बहुत सारे नए सदस्य भी चुनकर आए हैं उन्हें वरिष्ठ सदस्यों का आशीर्वाद मिले उनसे वह सीख सकें इस बात की चिंता भी हम वर्ष सदस्यों को लेना चाहिए। सदन की कार्रवाई के नियम हैं उनसे सदन चलता है। नए सदस्य सीख कर अपने दायित्व का निर्वहन करें यह भी हमें चिंता करना होगा।
मैं आग्रह करना चाहता हूं कि राजनीतिक क्षेत्र में काम करने वाला व्यक्ति जितना अधिक अध्ययन करेगा उतना अधिक बहुत सार्थक जीवन व्यतीत कर सकेगा और लोकतंत्र में सार्थक भूमिका निभा सकेगा राजनीतिक परिदृश्य में मौखिक भूमिका ज्यादा है। इसलिए कई बार अध्यन अध्ययन का पक्ष ओझल हो जाता है।